रायपुर। बिलासपुर के संयुक्त मसीही समाज (Sanyukt Masihi Samaj) छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के विरोध में प्रदेशभर में किए गए कथित प्रदर्शनों से खुद को अलग करते हुए कड़ा बयान जारी किया है। संगठन ने ‘द लेंस’ स्पष्ट किया है कि इन प्रदर्शनों से मसीही समुदाय या उनके किसी आधिकारिक संगठन का कोई संबंध नहीं है। इसके साथ ही संगठन ने विधेयक का समर्थन किया है।


अपने बयान में संगठन ने कहा है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा संयुक्त मसीही समाज के नाम का दुरुपयोग कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन के अनुसार, ‘संयुक्त मसीही समाज’ नाम से बिलासपुर संभाग में केवल एक ही पंजीकृत इकाई है, और अन्य स्थानों पर इस नाम का उपयोग करना भ्रामक होने के साथ-साथ कानूनी रूप से आपत्तिजनक और दंडनीय है।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि मसीही समुदाय शांति और अनुशासन में विश्वास रखता है तथा किसी भी प्रकार के उग्र विरोध या अशांति का समर्थन नहीं करता। बयान में कहा गया कि सभी नागरिकों को शासन और अधिकारियों के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए तथा देश की शांति और व्यवस्था के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।
संगठन ने प्रशासन से मांग की गई है कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर संयुक्त मसीही समाज के नाम के दुरुपयोग पर कानूनी कार्रवाई की जाए और ऐसे संगठनों पर रोक लगाई जाए। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि वे ऐसे भ्रामक तत्वों से सतर्क रहें, जो समाज के नाम पर अपनी राजनीतिक गतिविधियां चला रहे हैं।
संयुक्त मसीही समाज ने दोहराया कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल अनुचित हैं, बल्कि समाज की छवि को भी धूमिल कर रही हैं।
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