सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की याचिका

Pawan Khera Bail petition Dismissed

नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने असम पुलिस द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ दर्ज फर्जीवाड़ा और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर लगाए गए स्टे को हटाने की मांग की थी।

कोर्ट ने खेड़ा की उस मांग को भी ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने अगले मंगलवार तक ट्रांजिट जमानत बढ़ाने की गुहार लगाई थी, ताकि वे सोमवार को असम की अदालत में जा सकें। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की बेंच ने कहा कि अगर संबंधित अदालत काम नहीं कर रही है, तो मामला सुनवाई के लिए लगाने का अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर प्रचलित प्रथा के अनुसार विचार किया जाएगा।

बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि न तो तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश में दी गई टिप्पणियां और न ही सुप्रीम कोर्ट के स्टे आदेश का असम की अदालत पर पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करते समय कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

यह मामला असम पुलिस द्वारा असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी शर्मा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। पवन खेड़ा पर आरोप था कि उन्होंने रिनिकी के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट होने का दावा किया था।

10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को एक सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। असम राज्य ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया। इसके बाद खेड़ा ने स्टे हटाने के लिए आवेदन दायर किया।

खेड़ा की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्रांजिट जमानत को अगले मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की, ताकि वे सोमवार को असम की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकें। इस पर जस्टिस माहेश्वरी ने सॉलिसिटर जनरल के उस तर्क का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर करते समय अपने आधार कार्ड का फ्रंट और पत्नी के आधार कार्ड का बैक साइड जमा किया था, जो निवास साबित करने के लिए गलत दस्तावेज था। सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया था कि हाईकोर्ट से राहत गलत दस्तावेजों के आधार पर ली गई थी।

सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट में याचिका जल्दबाजी में दायर की गई थी, जिसमें दस्तावेजों में मिक्स-अप हो गया। बाद में हाईकोर्ट के सामने और दस्तावेज पेश किए गए, जिसमें साबित किया गया कि खेड़ा की पत्नी तेलंगाना में रहती हैं और वे तेलुगु हैं, जिन्होंने तेलंगाना विधानसभा चुनाव लड़ा था। उन्होंने कहा कि 15 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने एक्स-पार्टे स्टे केवल सॉलिसिटर जनरल के आधार कार्ड वाले तर्क पर लगाया था।

सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 18 में इन दस्तावेजों का जिक्र है और असम के एडवोकेट जनरल को भी सुनवाई के दौरान दस्तावेज सौंपे गए थे।
लेकिन बेंच ने समय बढ़ाने से इनकार कर दिया। सिंघवी ने मंगलवार तक समय मांगा और कहा, “आज शुक्रवार है, मैं सोमवार को फाइल कर रहा हूँ। क्या मैं कोई सख्त अपराधी हूँ कि मुझे यह राहत भी नहीं दी जा सकती?”

जस्टिस माहेश्वरी ने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के स्टे आदेश में क्या गलत है। सिंघवी ने कहा कि यह आदेश कोर्ट को गुमराह करके लिया गया। इस पर जस्टिस माहेश्वरी ने नाराजगी जताई और कहा कि खेड़ा ने हाईकोर्ट में गलत दस्तावेज पेश किया था।

सिंघवी ने तर्क दिया कि दस्तावेज में हुई छोटी गलती के लिए व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन नहीं होना चाहिए, जिसे बाद में असम एजी को सूचना देकर सुधार लिया गया। जस्टिस माहेश्वरी ने पूछा, “छोटी गलती? आप इसे छोटी गलती कह रहे हैं?”सिंघवी ने कहा कि कोर्ट को दिया गया कि दस्तावेज में फर्जीवाड़ा हुआ था, जबकि यह केवल गलती थी और हाईकोर्ट के सामने ही इसे स्पष्ट कर दिया गया था।उन्होंने कहा कि एक एफआईआर के लिए सैकड़ों असम पुलिस वाले खेड़ा की तलाश में हैं। उन्होंने पूछा कि क्या राज्य की ऐसी प्रतिक्रिया उचित है और मंगलवार तक समय बढ़ाने की अपील की।

जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि याचिकाकर्ता कल ही असम की अदालत जा सकते हैं। सिंघवी ने कहा कि संबंधित अदालत कल बंद है।सिंघवी ने यह आशंका भी जताई कि स्टे आदेश में “fabricated document” वाली टिप्पणी असम की अदालत को प्रभावित कर सकती है। जस्टिस माहेश्वरी ने कहा कि 15 अप्रैल के आदेश में ही स्पष्ट किया गया था कि इससे कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।सिंघवी ने स्पष्टीकरण और विस्तार मांगा, जिस पर कोर्ट ने फिर से स्पष्ट किया कि इन टिप्पणियों का संबंधित अदालत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

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