ओडिशा राज्य विधि आयोग ने हेट स्पीच और हेट क्राइम को रोकने के लिए नया कानून बनाने की सिफारिश की है। इस कानून में दोषी पाए जाने पर 1 से 5 साल तक की जेल और ₹10,000 तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति दोबारा अपराध करता है तो 2 से 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है। आयोग के पूर्व हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता वाली पैनल ने पीड़ितों को मुआवजा देने की भी सिफारिश की है।
मुख्य सिफारिशें
नया कानून का नाम ‘Hate Speech (Prevention) Act 2026’ है। सजा के तौर पर पहली बार अपराध पर 1 से 5 साल जेल + ₹10,000 जुर्माना और दोबारा अपराध पर 2 से 7 साल जेल + जुर्माना लगाया जाएगा। आयोग ने पीड़ितों के लिए मुआवजे का प्रावधान भी सुझाया है। परिभाषा में शामिल है – ‘नफरत भरा भाषण किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ बोले गए, लिखे गए या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से व्यक्त किसी भी ऐसे शब्द को माना जाएगा जो चोट, असहमति, शत्रुता या नफरत पैदा करने का इरादा रखता हो।’
क्या कहता है आयोग ?
आयोग ने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर नफरत भरे भाषण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए अब समय आ गया है कि राज्य सरकार इस दिशा में सख्त कानून लाए। ओडिशा के राज्य विधि मंत्री प्रिथ्वीराज हरिचंदन ने बुधवार को कहा कि सरकार विधि आयोग की सिफारिशों का परीक्षण करेगी और प्रस्तावित कानून को लागू करने पर विचार करेगी।
आयोग की सिफारिश के अनुसार पुलिस या मजिस्ट्रेट को यदि लगे कि नफरत अपराध होने वाला है, तो वे रोकथाम के लिए कदम उठा सकते हैं। संगठन अगर ऐसा अपराध करता है तो उसके पदाधिकारी दोषी माने जाएंगे जब तक वे खुद को बेगुनाह साबित न करें।
यह सिफारिश जनवरी 2026 में तैयार की गई ड्राफ्ट बिल ‘Hate Speech (Prevention) Act 2026’ के आधार पर की गई है। आयोग ने इसे राज्य सरकार को भेज दिया है।











