NCERT को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा, डिग्री देने का मिला अधिकार

April 3, 2026 6:24 PM
NCERT

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने  NCERT को ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ (Institution Deemed to be University) घोषित कर दिया है।  यह दर्जा UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की सलाह पर और UGC अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत एक विशेष/अलग श्रेणी (distinct category) में दिया गया है।

इस संबंध में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 30 मार्च को एक अधिसूचना जारी की है। जिसके अनुसार  NCERT की छह इकाइयां स्वतंत्र रूप से डिग्री कोर्स चला सकेंगी और डिग्री प्रदान कर सकेंगी। NCERT अब अपनी क्षेत्रीय संस्थाओं के माध्यम से नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू कर सकेगी, शोध कर सकेगी और PhD जैसे उच्च शिक्षा कार्यक्रम भी चला सकेगी, बशर्ते वह UGC के सभी नियमों और मानकों का पालन करे।

ये इकाइयां चला सकेंगी डिग्री कोर्स

  • रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, अजमेर (राजस्थान)
  • रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, भोपाल (मध्य प्रदेश)
  • रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, भुवनेश्वर (ओडिशा)
  • रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, मानसगंगोत्री, मैसूर (कर्नाटक)
  • नॉर्थ ईस्ट रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, शिलांग (मेघालय)
  • पंडित सुंदरलाल शर्मा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन, भोपाल (मध्य प्रदेश)

NCERT की स्थापना 1961 में एक सोसायटी के रूप में हुई थी, जिसका मुख्य काम स्कूली शिक्षा से संबंधित नीतियों, पाठ्यक्रम और अनुसंधान में सरकार को सहायता प्रदान करना था। अब यह दर्जा मिलने के बाद इसका दायरा बढ़ गया है।

क्या होती है डीम्ड यूनिवर्सिटी ?

डीम्ड यूनिवर्सिटी भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों को दिया जाने वाला एक विशेष दर्जा है। UGC अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार, UGC की सलाह पर, किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान (जो सामान्य विश्वविद्यालय न हो) को यह दर्जा दे सकती है, अगर वह किसी खास क्षेत्र में बहुत उच्च स्तर का काम कर रहा हो। ऐसे संस्थान को विश्वविद्यालय के समान ही शैक्षणिक दर्जा और अधिकार मिल जाते हैं।

वे स्वतंत्र रूप से कोर्स डिज़ाइन कर सकते हैं, परीक्षाएं आयोजित कर सकते हैं, डिग्री प्रदान कर सकते हैं और अपनी प्रवेश प्रक्रिया चला सकते हैं। उन्हें पूर्ण स्वायत्तता मिलती है, लेकिन उन्हें UGC के नियमों और मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है।

सामान्य विश्वविद्यालयों की तरह ये भी डिग्री देने के अधिकारी होते हैं, लेकिन ये किसी विधेयक या एक्ट से स्थापित नहीं होते, बल्कि सरकार की अधिसूचना से ‘माना जाता है’ कि वे विश्वविद्यालय हैं।

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