महिला जज को ऑनलाइन धमकाने के मामले के एमपी हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लिंचिंग मामले के फैसले के बाद जज को धमकियों की सूचना पर स्वत: संज्ञान लिया, सुरक्षा के निर्देश दिए। अदालत ने कहा “ऐसी गतिविधियां सीधे तौर पर हमारी न्यायिक स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारियों के निर्भय कार्य को बाधित करती हैं।”

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को समाचार रिपोर्टों पर स्वत: संज्ञान लिया, जिसमें गौ-रक्षकों के खिलाफ लिंचिंग मामले में फैसला सुनाने वाली जज के खिलाफ सांप्रदायिक धमकियां दी गई थीं।ऐसी धमकियों को देखते हुए आदलत ने ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को व्यक्तिगत रूप से नर्मदापुरम जिले की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की व्याख्या करने को कहा।

न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने 1 जुलाई को राज्य के न्यायिक अधिकारियों से संबंधित लंबित स्वत: संज्ञान याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। नअहतावपूर्ण है कि जज को निर्णय सुनने के बाद उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया और धमकियां दी गईं।

यह उनके द्वारा 2022 में गौ-तस्करी के शक में ट्रक ड्राइवर शेख लाला नजीर अहमद की लिंचिंग के मामले में 7 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद हुई थी।

इसे “गंभीर मामला” बताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी हरकतें न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सीधे तौर पर कमजोर करती हैं।अदालत ने कहा“हमारा मानना है कि ऐसी गतिविधियां हमारी न्यायिक स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारियों के निर्भय कार्य को सीधे तौर पर बाधित करती हैं,”।

अंतरिम उपाय के रूप में अदालत ने निर्देश दिया कि नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक के माध्यम से न्यायाधीश तबस्सुम खान को पुलिस सुरक्षा जारी रखी जाए।हालांकि राज्य ने अदालत को बताया कि सुरक्षा पहले ही प्रदान कर दी गई है, लेकिन खंडपीठ ने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि धमकियां देने वाले आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की व्याख्या करते हुए हलफनामा दाखिल करें।

डिप्टी एडवोकेट जनरल अभिजीत अवस्थी ने अदालत को बताया कि इस घटना के संबंध में पहले ही FIR दर्ज कर ली गई है।खंडपीठ ने जोर दिया कि न्यायिक आदेश कानून के तहत अपीलीय या पुनरीक्षण की जांच के अधीन होते हैं और इन्हें जजों को डराने-धमकाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

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