लेंस डेस्क। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के टमाटर किसानों पर साफ दिखने लगा है। खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात लगभग ठप पड़ने से घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से गिर गई हैं। हालात ऐसे हैं कि किसानों को अपनी फसल लागत से भी कम दाम पर बेचनी पड़ रही है और कई जगह तो किसानों को मजबूरी में टमाटर फेंकना पड़ रहा है।
एनडीटीवी की खबर के मुताबिक महाराष्ट्र के जालना जिले में एक किसान ने विरोध के तौर पर अपनी पूरी उपज सड़क किनारे फेंक दी। धरकल्या गांव के किसान अमर काकड़े जब अपनी फसल लेकर कर्माड मंडी पहुंचे, तो व्यापारियों ने उन्हें मात्र 4 रुपये प्रति किलो का भाव दिया। यह कीमत उनकी लागत और ढुलाई खर्च से भी कम थी। निराश होकर उन्होंने करीब 25 क्विंटल टमाटर हाईवे के पास फेंक दिए।
व्यापारियों का कहना है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के चलते निर्यात बंद हो गया है, जिससे मांग में भारी गिरावट आई है और बाजार में टमाटर की आपूर्ति बढ़ गई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
फ्री प्रेस जर्नल ने रिपोर्ट की है कि दक्षिण भारत में भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। तमिलनाडु के कई थोक बाजारों में टमाटर के दाम इस कदर गिर गए हैं कि किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे। लगातार घाटे से परेशान होकर कई किसानों ने फसल की कटाई ही रोक दी है और टमाटरों को खेतों में ही छोड़ना शुरू कर दिया है, ताकि और नुकसान से बचा जा सके।
पूर्वी भारत में भी इसका असर दिख रहा है। झारखंड के किसान, जो पिछले कुछ वर्षों में खाड़ी देशों जैसे यूएई, ओमान, कतर और सऊदी अरब को सब्जियों का निर्यात करने लगे थे, अब बुरी तरह प्रभावित हैं। राज्य में टमाटर 7 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। किसानों का कहना है कि निर्यात रुकने से उन्हें स्थानीय बाजारों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जहां पहले से ही आपूर्ति अधिक है और कीमतें दबाव में हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, टमाटर जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों के लिए निर्यात बाजार बेहद अहम होता है। जैसे ही यह रास्ता बंद होता है, घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ जाती है और कीमतें गिर जाती हैं। ऐसे में किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।










