Middle East crisis: ईरान में 555 लोगों की मौत, अमेरिका-इजरायल को कितना हुआ नुकसान? शेयर बाजार लहूलुहान

Middle East crisis

  लेंस डेस्‍क। अमेरिका और इज़रायल की ओर से ईरान पर शुरू किए गए सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और ‘रोअरिंग लायन’ का तीसरा दिन रहा, जिसमें दोनों पक्षों से लगातार हमले जारी रहे। इन हमलों में ईरान में 555 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि कम से कम तीन अमेरिकी सैनिकों में मारे जाने की खबरें हैं।

यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के साथ शुरू हुआ था, जब अमेरिकी-इज़रायली हवाई हमलों ने ईरान के नेतृत्व, सैन्य ठिकानों और मिसाइल साइटों को निशाना बनाया।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इज़रायल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज किए, जबकि अमेरिका और इज़रायल ने तेहरान समेत ईरान के आंतरिक क्षेत्रों पर बमबारी जारी रखी। मध्‍य पूर्व में जारी तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी, तेल की कीमतें 13% उछलीं। यह क्षेत्रीय तनाव लेबनान और इराक तक फैल गया है।

इसका असर आज भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दिया। सप्‍ताह के पहले कारोबारी दिन ही सेंसेक्स और निफ्टी एक फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिससे निवेशकों का भरोसा टूटा। ग्लोबल बाजारों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली ने भी माहौल खराब किया।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सुबह कारोबार में 2,743 अंकों तक गिरकर 78,543 पर पहुंच गया था। बाद में कुछ सुधार के साथ यह 1,048 अंकों यानी 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,238 पर बंद हुआ। निफ्टी भी करीब 313 अंकों की कमी के साथ 24,865 के स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट कई महीनों में सबसे ज्यादा है। बाजार विशेषज्ञों की मानें तो पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतें आगे भी बाजार पर असर डाल सकती हैं।

US israel iran war: कहां-कहां हुए हमले?

इज़रायल ने तेहरान के केंद्र में आईआरजीसी (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के ठिकानों और बसिज मिलिशिया बेस पर हमले किए, जिससे राजधानी में धुएं के गुबार उठे।

ईरान ने ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ अभियान के तहत सातवीं से नौवीं लहर में बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च किए, जो इज़रायल के तेल अवीव और यरुशलम इलाकों, साथ ही अमेरिकी सैन्‍य ठिकानों कुवैत, यूएई, बहरीन, कतर को निशाने पर लिया।

कुवैत में तीन अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमानों के गिरने की खबर है। ईरान ने पहली बार ‘फतह-2’ हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया दावा किया, जो अमेरिकी ठिकानों पर हमले के लिए इस्तेमाल की गई।

इसके अलावा ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक मार्शल आइलैंड्स ध्वज वाले टैंकर ‘एमकेडी व्योम’ पर अनमैन्ड स्पीडबोट से हमला किया, जिसमें एक क्रू सदस्य की मौत हो गई और बाकी 20 को निकाला गया।

कतर में ऊर्जा सुविधाओं पर ईरानी हमलों के बाद कतर एनर्जी ने एलएनजी उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया। इज़रायल ने हिज़्बुल्लाह के खिलाफ लेबनान में हमले किए, जिसमें बेरूत और दक्षिणी लेबनान में 31 लोग मारे गए।

इराकी मिलिशिया ने इराक और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए, जबकि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों को धमकी दी।

अमेरिका और इज़रायल को नुकसान

कुवैत स्थित अमेरिकी बेस पर ईरानी हमलों में चार अमेरिकी सैनिक मारे गए और पांच गंभीर रूप से घायल हुए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि और हताहत होने की संभावना है। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के नौ युद्धपोत डुबोने का दावा किया है, लेकिन यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर पर ईरान के हमले को पूरी तरह से नकारा है। हालांकि खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों बहरीन, यूएई पर ईरानी मिसाइलों से मामूली क्षति हुई।

इज़रायल में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों ने बीत शेमेश पर हमला किया, जिसमें नौ नागरिक मारे गए और 20-30 घायल हुए। यह इज़रायल में अब तक का सबसे घातक हमला माना जा रहा है। यरुशलम के एक इलाके में छह-सात लोग घायल हुए, जबकि तेल अवीव में आईडीएफ मुख्यालय ‘किरया’ के पास 300-500 मीटर की दूरी पर मिसाइल गिरी, जिससे आसपास की रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं।

ईरान में अब तक क्या-क्या नुकसान हुआ?

ईरान सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां अमेरिकी-इज़रायली हमलों ने 131 शहरों/काउंटियों में 2,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया। सैन्य प्राथमिकताएं हवाई रक्षा दमन, जवाबी क्षमता कमजोर करना और कमांड-कंट्रोल बाधित करना रहीं। तेहरान में गांधी अस्पताल क्षतिग्रस्त हुआ, एक स्कूल पर हमले में 165 बच्चे समेत कई नागरिक मारे जा चुके हैं।

ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार, ईरान में 555 मौतें हुईं, जिसमें सैकड़ों घायल हैं इनमें नागरिक और सैनिक दोनों शामिल हैं।

इज़रायल, अमेरिका और ईरान की ओर से क्या कहा गया?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी उद्देश्य हासिल नहीं हो जाते यह चार हफ्तों या कम में हो सकता है, लेकिन और अमेरिकी हताहत हो सकते हैं।” उन्होंने ईरानियों से अपील की कि वे “अपनी सरकार पर कब्जा करें” और नए नेतृत्व के साथ बातचीत की संभावना जताई।

जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा, “यह एक रात का ऑपरेशन नहीं है; और नुकसान होने की उम्मीद है, लेकिन हम अमेरिकी नुकसान कम करने की कोशिश करेंगे।”

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, “हमलों ने एक अस्तित्वगत खतरे को दूर किया है और हम एक सहयोगी क्षेत्र की उम्मीद करते हैं।” इज़रायल ने हिज़्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर लेबनानी प्रतिबंध का स्वागत किया।

ईरान की ओर से अली लारीजानी ने ट्रंप के उद्देश्यों को “भ्रमपूर्ण” बताया और कहा, “हम बातचीत से इनकार करते हैं; बदला लिया जाएगा।” आईआरजीसी ने दावा किया कि अमेरिकी ठिकानों पर “सैकड़ों हताहत” हुए और क्षेत्रीय हमलों को जारी रखने की धमकी दी। ईरानी राज्य मीडिया ने हमलों को “नरसंहार” करार दिया

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