बंगाल में नाम कटने के बावजूद अपील करने वाले लाखों लोगों को मिला वोट डालने का अधिकार

Supreme Court

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR (West Bengal SIR) में नाम कट चुके मतदाता को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि आगामी मतदान चरणों में वोट डालने के लिए, जिन व्यक्तियों की नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील एपीलेट ट्रिब्यूनल द्वारा तय की जा चुकी हो, उनके नाम को पूरक संशोधित मतदाता सूची में शामिल किया जाए।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन अपीलकर्ताओं की अपील एपीलेट ट्रिब्यूनल द्वारा 21 अप्रैल (पहले चरण के लिए) या 27 अप्रैल (दूसरे चरण के लिए) तक स्वीकार कर ली जाती है, उन्हें पूरक सूची में शामिल किया जाए, ताकि वे संबंधित मतदान तिथियों पर वोट डाल सकें ।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एपीलेट ट्रिब्यूनल द्वारा अपील स्वीकार कर ली जाती है और नाम शामिल करने या हटाने का अंतिम निर्देश जारी हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल या 29 अप्रैल को मतदान शुरू होने से पहले ऐसे निर्देशों को लागू किया जाना चाहिए।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत और जस्टिस जोयमल्या बागची की बेंच ने कहा:“इसलिए, हम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए चुनाव आयोग को निर्देश देते हैं कि जहां भी एपीलेट ट्रिब्यूनल 21.04.2026 या 27.04.2026 तक अपीलों का फैसला कर सकें, ऐसे अपीलीय आदेशों को पूरक संशोधित मतदाता सूची जारी करके प्रभावी बनाया जाए, और मतदान के अधिकार से संबंधित सभी आवश्यक परिणाम निकलने चाहिए।”

बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ अपील दायर करने भर से किसी व्यक्ति को वोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा।हालांकि, यह बिना कहे स्पष्ट है कि निकाले गए व्यक्तियों द्वारा एपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने दायर अपीलों के मात्र लंबित रहने से उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं मिलेगा।यह आदेश पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से संबंधित मामलों में दिया गया। मामले की सुनवाई 13 अप्रैल को हुई थी, लेकिन आदेश आज दोपहर में अपलोड किया गया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें अपील लंबित रहने के दौरान अंतरिम रूप से वोट देने का अधिकार मांगा गया था। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा किया गया तो उन व्यक्तियों के खिलाफ भी अंतरिम रूप से वोटिंग अधिकार रोकने की मांग आ सकती है, जिनके नाम सूची में शामिल हैं लेकिन उनके खिलाफ अपील दायर की गई है। इससे पहले वाली स्थिति फिर से बन जाएगी, जो कोर्ट के अनुसार स्वीकार्य नहीं है।

कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि पश्चिम बंगाल के न्यायिक अधिकारियों ने झारखंड और ओडिशा के अधिकारियों की मदद से SIR प्रक्रिया में 60 लाख से अधिक आपत्तियों का फैसला बहुत कम समय में पूरा किया है। यह एक वास्तव में बहुत बड़ा कार्य था।

अब तक 34 लाख से अधिक अपीलें एपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने दायर की जा चुकी हैं।कोर्ट ने मुख्य मामले को आगे की सुनवाई के लिए 24 अप्रैल 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories