लखनऊ। ज़ी न्यूज़ की टीम को आज “जनचेतना” के लखनऊ कार्यकाल से खाली हाथ लौटना पड़ा। ज़ी की रिपोर्टर प्रीति श्रीवास्तव और कैमरामैन आज जनचेतना पहुंचकर नोएडा के मज़दूर आंदोलन पर लेखिका, कवि कात्यायनी का इंटरव्यू लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।
शुरू में उनको विनम्रता से कह दिया गया कि हम लोग ज़ी न्यूज़ और गोदी मीडिया के तमाम चैनलों का बहिष्कार करते हैं और आपसे हमें कोई बात नहीं करनी है। फिर भी वे कात्यायनी के पीछे पड़ गये और कैमरा लेकर जनचेतना में घूमकर वीडियो बनाने लगे। तब वहां मौजूद लोगों को जी न्यूज को बाजार जाने को कहना पड़ा।
महत्वपूर्ण है कि मज़दूर बिगुल अख़बार की संपादक कात्यायनी नहीं हैं। हालांकि नोएडा पुलिस ने मजदूर आंदोलन में जनचेतना की भूमिका पर सवाल खड़े किए है और लखनऊ पुलिस की ओर से कात्यायनी समेत तीन लोगों से पूछताछ की जा रही है।
जनचेतना का कहना था कि हम पुलिस की जांच में भी हम सहयोग कर रहे हैं। लेकिन गोदी मीडिया को हम क्यों जवाब दें, जिनका काम ही झूठे नैरेटिव गढ़ना और फ़र्ज़ी ख़बरें चलाकर बेगुनाह लोगों को फँसाना है?









