दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस कारिया ने केजरीवाल, रवीश कुमार के खिलाफ अवमानना याचिका से खुद को अलग किया

Justice Tejas Karia

नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस तेजस कारिया ने बुधवार को एक जनहित याचिका (PIL) सुनने से खुद को अलग कर लिया। इस PIL में अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं और पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।

आरोप यह है कि उन्होंने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत में शराब नीति मामले की कार्यवाही के वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर प्रकाशित किए। यह मामला चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच के सामने आया। जस्टिस कारिया ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। अब यह केस गुरुवार को किसी दूसरी बेंच के सामने सुनवाई के लिए लगाया जाएगा।

याचिका वकील वैभव सिंह ने दायर की है। इसमें जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत में अरविंद केजरीवाल द्वारा अपनी याचिका (जस्टिस शर्मा की रिक्यूसल मांगते हुए) की बहस के वीडियो रिकॉर्डिंग पर आपत्ति जताई गई है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे।

केजरीवाल और रवीश कुमार के अलावा, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, AAP के मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, और अन्य नेताओं — संजीव झा, पुरंदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा — के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।

याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से इन वीडियो को हटाने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोपयाचिका में कहा गया है कि केजरीवाल ने अदालत के सामने “तुच्छ, अपमानजनक और भ्रामक” दलीलें दीं, बिना किसी आधार के। साथ ही उन्होंने “न्याय का मंदिर” और जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत के खिलाफ भी बयान दिए।

याचिका में आगे कहा गया कि AAP के कई नेता और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने जानबूझकर इस माननीय अदालत की छवि को खराब करने, लोगों को गुमराह करने और देश-विदेश में इस संस्था की नकारात्मक छवि बनाने के इरादे से अदालत की कार्यवाही का ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग किया और X, Facebook, Instagram, YouTube तथा विभिन्न न्यूज चैनलों पर प्रसारित किया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरीके से वीडियो वायरल होने की परिस्थितियां “गहरी साजिश” की ओर इशारा करती हैं, जिसका मकसद न्यायपालिका की छवि खराब करना, आम लोगों को गुमराह करना और यह दिखाना है कि न्यायपालिका कुछ राजनीतिक दलों या केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रही है।

यह भी पढ़ें: मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने चार आरोपियों को बरी किया, आरोप रद्द

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories