रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में हुई सांप्रदायिक घटनाओं के विरोध में जन संघर्ष मोर्चा छत्तीसगढ़ ने एक बैठक कर आवाज बुलंद की। बैठक में तय किया गया कि अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर ईसाई और मुसलमानों के खिलाफ फैलाई जा रही साम्प्रदायिक नफरत के खिलाफ विरोध तेज किया जाएगा।
साथ ही चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए बड़ी संख्या में गरीब, मजदूर, प्रवासी कामगार, महिलाएं, आदिवासी, अल्पसंख्यक और बेघर लोगों के वोटर अधिकार छीने जाने का आरोप भी लगाते हुए इसे एक साजिश बताया गया।
25 जनवरी 2026 को रायपुर में हुई बैठक में जन संघर्ष मोर्चा ने तय किया कि छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, जमात-ए-इस्लामी हिंद छत्तीसगढ़, मूलनिवासी संघ छत्तीसगढ़, किसान मजदूर संघ छत्तीसगढ़ और क्रिश्चियन संघ छत्तीसगढ़ जैसे कई संगठनों को मोर्चे में शामिल किया जाएगा।
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में मौजूद जातिवाद विरोधी, धार्मिक कट्टरता विरोधी और समानता वाले मूल्यों को आधार बनाकर जमीनी स्तर पर अभियान चलाए जाएगा।
आदिवासी इलाकों में कंपनियों द्वारा जंगल, जमीन और पानी की लूट रोकने और असंगठित मजदूरों व प्रवासी कामगारों के हक के मुद्दों को जोर-शोर से उठाने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा, मोर्चे का एक फासीवाद विरोधी जन घोषणापत्र भी मंजूर किया गया।
बैठक की अध्यक्षता मोर्चा के संयोजक प्रसाद राव ने की। इसमें कई संगठनों के नेता जैसे लखन सुबोध, वीरेंद्र भारद्वाज, सौरा (भाकपा माले रेड स्टार), एडवोकेट शाकिर कुरैशी, तुहिन, जनक लाल ठाकुर, मोहम्मद वाहिद सिद्दीकी, श्याम मूरत कौशिक, अमरजीत पटेल, साजी जॉन, अखिलेश एड्गर, हेमंत टंडन, मूलचंद साहू, पास्टर चौआराम, पास्टर राजेंद्र चंद्राकर, पास्टर जगदीश जगत, जे पी बौद्ध, बज्जरंगी रजक और लखबीर सिंह शामिल हुए।







