जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में हाल ही भूमकाल स्मृति दिवस के मौके पर हुए एक आयोजन में बजे एक गाने से शासन, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं। जगदलपुर में सर्व आदिवासी समाज की ओर से 116वीं वर्षगांठ पर बड़ी रैली निकाली गई। जश्न का माहौल था, जोश था, उत्साह था लेकिन इसी बीच एक गाना बज उठा, जिसने पूरे मामले को विवादास्पद बना दिया। यह गाना नक्सली कमांडर माडवी हिड़मा को समर्पित था। वही हिड़मा जो सुरक्षा बलों से हुई मुठभेड़ में 18 नवंबर को मारा गया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जब यह सब घट रहा था तो पुलिस भी मौके पर मौजूद थी। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोगों ने सवाल खड़े किए – पुलिस मौजूद थी, फिर भी ऐसा गाना कैसे बजा? क्या ये अनजाने में हुआ, या कोई सोचा-समझा कदम था?
10 फरवरी को हुई इस घटना पर सर्व आदिवासी समाज के संभाग अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने सफाई देते हुए कहा कि गाना ऑटो-प्ले की वजह से बज गया। हम इस गाने का पूरी तरह खंडन करते हैं। वह नक्सलवाद का समर्थन नहीं करते।
“जगदलपुर के एसपी शलभ सिन्हा ने मीडिया को बताया कि ‘वीडियो हमारे संज्ञान में आया है। आयोजकों से पूछताछ की जा रही है। ये साफ किया जा रहा है कि गाना किन परिस्थितियों में बजा। पुलिस पूरी जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जाएगी।’”
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने क्या कहा?
इस बीच छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का एक बयान भी मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। जिसमें उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति या समूह जल, जंगल और जमीन की रक्षा करेगा, उसे जनता का पूरा सहयोग मिलेगा। वहीं, जो इन संसाधनों की लूट या दोहन करेगा, उसका कड़ा विरोध होगा चाहे वह कोई राजनीतिक दल हो, सरकार हो या कोई निजी कंपनी।
उन्होंने बस्तर समेत पूरे राज्य की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई कि यहां खनिज संसाधनों का बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा है और लोगों के संवैधानिक हकों का उल्लंघन किया जा रहा है। अगर कोई अपनी जमीन या अधिकारों के लिए आवाज उठाता है, तो उसे नक्सली का ठप्पा लगाकर दबा दिया जाता है या मार दिया जाता है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा को जल-जंगल-जमीन का संरक्षक मानते हैं, तो भगत ने जवाब दिया कि बात सिर्फ हिडमा की नहीं है। उनका मतलब हर उस व्यक्ति या समूह से है जो इन प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करता है चाहे वह कांग्रेस हो, भाजपा हो या कोई आदिवासी समुदाय। ऐसे सभी को उनका समर्थन मिलेगा।
अमरजीत भगत के बयान पर कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से नक्सलियों के पक्ष में रही है। झीरम घाटी कांड पर तो सिर्फ दिखावे के आंसू बहाए जाते हैं, जबकि असल में नक्सलवाद खत्म होने से कांग्रेस को तकलीफ हो रही है। उनके अनुसार कांग्रेस बस्तर में विकास नहीं चाहती और हमेशा नक्सलियों को संरक्षण देती आई है।










