ट्रंप का बड़ा दावा – बातचीत के लिए ईरान की पेशकश, लेकिन हो चुकी है देर

June 19, 2025 2:25 AM
Israel-Iran Conflict

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान अब उनसे बातचीत की इच्छा जता रहा है, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को साफ तौर पर नकार दिया। ट्रंप का कहना था, “मैं पहले ही कह चुका हूं कि अब समय निकल चुका है।” यह बयान तब आया जब ईरान और इस्राइल के बीच सैन्य तनाव चरम पर है और वैश्विक स्तर पर अमेरिका की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

ट्रंप ने पहले यह रुख अपनाया था कि अमेरिका को इस विवाद से अलग रहना चाहिए, लेकिन अब उनके ताजा बयानों से लगता है कि वे केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि एक बड़े और व्यापक समझौते की ओर बढ़ना चाहते हैं। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका की नीति अब पहले से ज्यादा कठोर हो गई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को सिर्फ युद्ध रोकने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि एक दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सही रणनीति अपनाने पर अमेरिका को बड़ी सफलता मिल सकती है।

पिछले कुछ हफ्तों में ईरान और इस्राइल के बीच तनाव तेजी से बढ़ा है, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं। इस स्थिति से अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है कि यह टकराव क्षेत्रीय युद्ध का रूप न ले ले, जिसमें अमेरिका जैसे बड़े देश भी उलझ सकते हैं। विश्व की प्रमुख शक्तियां दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रही हैं ताकि पश्चिम एशिया में बड़ा संघर्ष टाला जा सके।

ट्रंप लंबे समय से खुद को एक कुशल सौदेबाज के रूप में पेश करते रहे हैं। उनके हालिया बयानों से लगता है कि वे सिर्फ शांति स्थापित करने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक या राजनीतिक समझौता करना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने ईरान की बातचीत की पेशकश को यह कहकर ठुकरा दिया कि अब बहुत देर हो चुकी है।

Israel-Iran Conflict : खामेनेई ने दिखाए तेवर

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक टीवी संबोधन में अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि ईरान कभी झुकेगा नहीं और अगर अमेरिका ने युद्ध थोपा, तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा जो उसे भारी नुकसान पहुंचाएगा। खामेनेई ने यह भी कहा कि ईरान और उसके इतिहास को समझने वाले लोग इस देश से धमकी भरी भाषा में बात नहीं करते, क्योंकि ईरानी राष्ट्र किसी भी थोपी गई जंग में हार नहीं मानेगा और अमेरिका को किसी भी सैन्य हस्तक्षेप की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

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