नेशनल ब्यूरोनई दिल्ली। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी त्रासदी (Indore water crisis) मामले में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की घंटे वाली टिप्पणी की वजह से एक एसडीएम को निलंबन झेलना पड़ा है। दरअसल सरकारी आदेश मे इन सबका जिक्र करने पर यह कार्रवाई की गई है।दरअसल देवास के एसडीएम आनंद मालवीय ने कांग्रेस की प्रस्तावित रैली की सुरक्षा के लिए जारी इस आदेश में कांग्रेस के उस ज्ञापन के एक हिस्से की हू-ब-हू नकल उतार दी गई थी जो प्रमुख विपक्षी दल ने विरोध प्रदर्शन की पूर्व सूचना के लिए प्रशासन को दिया था

कांग्रेस के ज्ञापन में इंदौर की पेयजल त्रासदी को लेकर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार पर निशाना साधा गया था और कहा गया था कि विजयवर्गीय द्वारा एक पत्रकार के प्रश्न के उत्तर में अशोभनीय शब्द ‘घंटा’ का उपयोग करना ‘अमानवीयता और निरंकुशता’ की निशानी है।ज्ञापन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया था कि इस अमानवीय व्यवहार’ के विरोध में भाजपा के सांसद और विधायकों के निवास के सामने ‘घंटा’ बजाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
यह प्रदर्शन इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से लोगों की मौत और इस त्रासदी के बारे में एक टीवी पत्रकार के प्रश्न पर विजयवर्गीय की विवादास्पद टिप्पणी के विरोध में आयोजित था।कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में 31 दिसंबर की रात टीवी पत्रकार द्वारा पेयजल त्रासदी के बारे में सवाल पूछे जाने पर कैमरे के सामने ‘घंटा’ शब्द का इस्तेमाल करके विवाद खड़ा कर दिया था।
आम बोलचाल में मोटे तौर पर इस शब्द का अर्थ बकवास के रूप में समझा जाता है।प्रशासन ने शहर में दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि की है। हालांकि, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दो जनवरी को कहा था कि उन्हें घटना में 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। स्थानीय लोगों ने दूषित जल पीने से छह माह के बच्चे समेत 16 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है।











