नई दिल्ली। देश में कुशल प्रतिभाओं की कमी वैश्विक औसत से काफी अधिक हो गई है। देश के 82% नियोक्ताओं को योग्य कर्मचारियों को ढूंढने में कठिनाई हो रही है, जो वैश्विक औसत 72% से काफी ऊपर है। इस साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्किल्स सबसे कठिन ढूंढने वाली क्षमताओं में शीर्ष पर पहुंच गई हैं, जो पारंपरिक इंजीनियरिंग और आईटी स्किल्स को पीछे छोड़ चुकी हैं।
यह खुलासा हुआ है मैनपावरग्रुप के 2026 ग्लोबल टैलेंट शॉर्टेज सर्वे में। यह सर्वे 41 देशों के 39,063 नियोक्ताओं पर आधारित है, जिसमें भारत भी शामिल है। फील्डवर्क अक्टूबर 2025 में पूरा हुआ।

सर्वे में पाया गया कि भारत टैलेंट की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है, जहां 10 में से 8 से अधिक नियोक्ता इस समस्या से जूझ रहे हैं। पिछले साल की तुलना में यह दबाव बढ़ा है, जो श्रम बाजार में संरचनात्मक बदलाव का संकेत देता है।
मैनपावरग्रुप इंडिया और मिडिल ईस्ट के मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुलाटी ने कहा, “भारत में 82% टैलेंट की कमी, वैश्विक औसत 72% से काफी ऊपर है, जो बाजार में एक संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत है, न कि चक्रीय समस्या का।”
AI स्किल्स की मांग में उछाल
वैश्विक स्तर पर AI मॉडल और एप्लीकेशन डेवलपमेंट (20%) और AI लिटरेसी (19%) सबसे कठिन ढूंढने वाली स्किल्स हैं, उसके बाद इंजीनियरिंग (19%), सेल्स एंड मार्केटिंग (18%) और मैन्युफैक्चरिंग एंड प्रोडक्शन (17%) आते हैं। एशिया पैसिफिक और मिडिल ईस्ट (APME) क्षेत्र में यह और भी तीव्र है, जहां AI मॉडल डेवलपमेंट 27% और AI लिटरेसी 26% पर पहुंच गई है। भारत में भी AI स्किल्स नियोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं, जो पारंपरिक आईटी और डेटा स्किल्स को सातवें स्थान पर धकेल चुकी हैं।
मैनपावरग्रुप के चेयरमैन और सीईओ जोनास प्राइसिंग ने कहा, “AI स्किल्स की कमी का शीर्ष पर पहुंचना दर्शाता है कि टैलेंट लैंडस्केप कितनी तेजी से बदल रहा है। कंपनियां अपस्किलिंग और अधिक लचीले वर्कफोर्स मॉडल्स पर जोर दे रही हैं, क्योंकि उन्हें पोटेंशियल के आधार पर हायरिंग करनी होगी और पूरे वर्कफोर्स में AI लिटरेसी विकसित करनी होगी। AI नौकरियां खत्म नहीं कर रहा, बल्कि काम को नए रूप दे रहा है।”
मानवीय हुनर की अहमियत बरकरार
AI की मांग बढ़ने के बावजूद, मानवीय स्किल्स की वैल्यू कम नहीं हुई है। कम्युनिकेशन, कोलैबोरेशन और टीमवर्क (39%) सबसे अधिक मांगी जाने वाली विशेषताएं हैं, उसके बाद प्रोफेशनलिज्म और वर्क एथिक (36%) तथा एडाप्टेबिलिटी और लर्निंग की इच्छा (34%) आती हैं। ये स्किल्स AI के दौर में और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं।
देशों और इंडस्ट्रीज में कमी की तीव्रता
टैलेंट की कमी वैश्विक है, लेकिन इसकी तीव्रता अलग-अलग है। जर्मनी (83%), भारत (82%), जापान (84%) और स्लोवाकिया (87%) जैसे देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जबकि चीन (48%) में यह सबसे कम है। इंडस्ट्रीज में, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (75%), हॉस्पिटैलिटी (74%), पब्लिक सेक्टर, हेल्थ और सोशल सर्विसेज (74%) सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
इस कमी से निपटने के लिए 91% नियोक्ता विभिन्न रणनीतियां अपनाने पर जोर दे रहे हैं। अपस्किलिंग/रिस्किलिंग (27%) सबसे प्रमुख है, उसके बाद शेड्यूल फ्लेक्सिबिलिटी (20%), लोकेशन फ्लेक्सिबिलिटी (18%), वेज बढ़ाना (19%) और नए टैलेंट पूल्स को टारगेट करना (18%) शामिल हैं। बड़ी कंपनियां (1,000-4,999 कर्मचारी) में कमी 75% है, जो छोटी फर्मों (10 से कम कर्मचारी, 64%) से अधिक है।









