अडानी से जुड़े वीडियो हटाने के आदालती आदेश पर एडिटर्स गिल्ड की चिंता, ‘…कमजोर हो सकती है प्रेस की आजादी’

September 18, 2025 3:23 PM
Editors Guild of India

नई दिल्‍ली। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने दिल्ली की एक अदालत के उस आदेश पर चिंता जताई, जिसमें पत्रकारों को अदानी एंटरप्राइजेज के बारे में सामग्री प्रकाशित करने से रोका गया है जो बिना पुष्टि, आधारहीन और मानहानिकारक हो। एडिटर्स गिल्ड ने चेतावनी दी कि इस आदेश के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लग सकता है और प्रेस की आजादी कमजोर हो सकती है।

एडिटर्स गिल्ड ने एक बयान जारी कर कहा है, “ऐसे व्यापक अधिकार एक निजी कंपनी को देना, साथ ही सरकार द्वारा सामग्री हटाने के निर्देश जारी करना, सेंसरशिप की दिशा में एक कदम है। इससे वैध पत्रकारिता, टिप्पणी और व्यंग्य पर रोक लगने का खतरा है, जो अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतंत्रता के मूल अधिकार को कमजोर करता है।”

मंगलवार रात को सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने न्यूजलॉन्ड्री, द वायर, और एचडब्ल्यू न्यूज जैसे समाचार संगठनों, साथ ही पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता, अजीत अंजुम, रवीश कुमार और व्यंग्यकार आकाश बनर्जी को इस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।

एडिटर्स गिल्ड ने न्यायपालिका से आग्रह किया कि मानहानि के दावों का समाधान उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए हो, न कि एकतरफा निषेधाज्ञाओं से, जो प्री-सेंसरशिप के समान हों। साथ ही सरकार से संयम बरतने और निजी वादियों के लिए प्रवर्तन इकाई की तरह काम करने से बचने की अपील की गई।

एडिटर्स गिल्ड ने कहा, “लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रेस अनिवार्य है। कोई भी ऐसी व्यवस्था जो निजी हितों को आलोचनात्मक आवाजों को एकतरफा चुप करने की अनुमति देती है, जनता के जानने के अधिकार के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।”

दरअसल एडिटर्स गिल्ड की यह चिंता नई दिल्‍ली की रोहिणी जिला अदालत के उस आदेश के बाद उठी, जिसमें अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड बनाम परंजॉय गुहा ठाकुरता और अन्य के मामले में एक एकतरफा निषेधाज्ञा जारी की गई। इस आदेश ने नौ पत्रकारों और संगठनों, साथ ही अज्ञात लोगों को कंपनी के खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने या प्रसारित करने से रोक दिया।

आदेश के तहत, अदानी एंटरप्राइजेज को उन यूआरएल और लिंक को मध्यस्थों या सरकारी एजेंसियों को भेजने की अनुमति है, जिन्हें वह मानहानिकारक मानती है। इसके बाद इन एजेंसियों को 36 घंटे के भीतर सामग्री हटानी होगी।

इस आदेश के बाद सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किए, जिसमें 138 से अधिक यूट्यूब लिंक और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट हटाने के निर्देश दिए गए। यह नोटिस मेटा और गूगल को भेजा गया, जो इंस्टाग्राम और यूट्यूब के मालिक हैं।

मंत्रालय ने कहा, “उक्त आदेश का पालन करने के लिए उचित कार्रवाई करें और इस संदेश के जारी होने के 36 घंटे के भीतर कार्रवाई की जानकारी मंत्रालय को दें।”

6 सितंबर को अदालत के एक वरिष्ठ सिविल जज ने यह एकतरफा आदेश पारित किया था, जिसमें प्रतिवादियों को कंपनी के कारोबार को निशाना बनाने वाली कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया। एकतरफा आदेश वह होता है, जो बचाव पक्ष को सुने बिना जारी किया जाता है।

प्रतिवादियों में ठाकुरता, रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, अयास्कांत दास, आयुष जोशी, बॉब ब्राउन फाउंडेशन, ड्रीमस्केप नेटवर्क इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, गेटअप लिमिटेड, डोमेन डायरेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (इंस्त्रा के नाम से व्यापार करने वाली) और जॉन डो पक्ष शामिल हैं।

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