स्टाइपेंड, बॉण्ड और सुपर-स्पेशलिटी कैडर को लेकर डॉक्टरों का का कैंडल मार्च, हड़ताल 7 दिन टली लेकिन प्रदर्शन रहेगा जारी

रायपुर। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) रायपुर ने मंगलवार शाम चिकित्सकों की तीन प्रमुख मांगों को लेकर शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से शुरू हुआ यह मार्च कैजुअल्टी तक गया। डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने अनुशासन बनाए रखते हुए अपनी एकजुटता दिखाई।

इससे पहले 20 सितंबर को JDA छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल की स्वास्थ्य मंत्री के साथ महत्वपूर्ण वार्ता हुई थी। वार्ता के बाद संगठन ने 21 सितंबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को 7 दिन के लिए आगे बढ़ा दिया है।

डॉक्टरों की तीन मुख्य मांगें

स्टाइपेंड में वृद्धि – MBBS इंटर्न, बॉण्डेड मेडिकल ऑफिसर, पीजी रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट के मासिक स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जाए।

सेवा बॉण्ड की अवधि कम हो – अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट सेवा बॉण्ड की अवधि दो साल से घटाकर एक साल की जाए। यह व्यवस्था मौजूदा बैचों पर भी लागू हो।

सुपर-स्पेशलिटी कैडर का गठन – राज्य में सुपर-स्पेशलिटी कैडर बनाया जाए, ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए स्पष्ट करियर पथ और दीर्घकालिक सेवा व्यवस्था तैयार हो सके।

स्वास्थ्य मंत्री से क्या हुई बात?

JDA के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री ने मांगों के निराकरण के लिए 7 दिन का समय मांगा और आश्वासन दिया कि इस अवधि में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। संगठन ने इस आश्वासन का सम्मान करते हुए हड़ताल टालने का फैसला लिया। JDA का कहना है कि उनका उद्देश्य डॉक्टरों की जायज मांगों का समाधान करना है, लेकिन आम मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो, यह भी उनकी प्राथमिकता है। इसलिए सभी चिकित्सक नियमित ड्यूटी और चिकित्सा सेवाएं जारी रखेंगे।

अब क्या होगा विरोध?

अगले 7 दिनों में डॉक्टर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। इसमें ब्लैक रिबन प्रोटेस्ट, कैंडल मार्च, रैली और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम शामिल हैं।
अगर 7 दिन में मांगों का समाधान नहीं हुआ तो जनरल बॉडी बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल समेत अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं।

मांगों का महत्व

JDA छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य ने मेडिकल शिक्षा का अच्छा विस्तार किया है। अब जरूरत है कि यहां तैयार डॉक्टर राज्य में ही रुकें। सुपर-स्पेशलिटी कैडर बनने से विशेषज्ञ डॉक्टर आकर्षित होंगे और मरीजों को उन्नत इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

स्टाइपेंड को लेकर डॉक्टरों का तर्क है कि 2020 से 2025 के बीच महंगाई करीब 30 प्रतिशत बढ़ी है। वर्तमान 67,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड की वास्तविक कीमत घटकर लगभग 52,000 रुपये के बराबर रह गई है। JDA ने सरकार से सकारात्मक और तेज कार्रवाई की अपील की है। साथ ही प्रदेशवासियों को भरोसा दिलाया है कि मरीजों के हित और चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी रहेगी।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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