पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों में भारी हार के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग को हाईकमान का साथ

नई दिल्ली। Punjab में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे उनके हटाये जाने की किसी भी संभावना पर पूर्ण विराम लग गया है। महत्वपूर्ण है कि पंजाब नगरपालिका चुनावों में कांग्रेस दूर की दूसरी जगह पर रही। उसने 1,977 वार्डों में से केवल 397 वार्ड जीते, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने 958 वार्ड जीतकर शहरी स्थानीय निकायों पर अपना प्रभुत्व मजबूत कर लिया।

पंजाब राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 191 वार्ड, भाजपा ने 172 वार्ड, निर्दलीयों ने 251 और बसपा ने 7 वार्ड जीते।’

पंजाब में मुख्य विपक्षी पार्टी और 2022 में सत्ता गंवाने से पहले कई बार राज्य की सत्ता संभाल चुकी पूर्व सत्तारूढ़ पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस अधिकांश नगर निगमों में AAP को मजबूत चुनौती नहीं दे पाई।पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन कपूरथला में रहा, जहां उसने 31 वार्ड जीते और प्रमुख ताकत के रूप में उभरी।

चमकौर साहिब जैसे कुछ इलाकों में भी उसने सीमित सफलता हासिल की, लेकिन अपने संगठनात्मक आधार को व्यापक सफलता में नहीं बदल पाई।जानकार इसके पीछे पार्टी के भीतर की खींचतान को जिम्मेदार बताते हैं।

आपस में भिड़ गए कांग्रेसी

इन नतीजों के बीच में कांग्रेस हाईकमान ने कांग्रेस के नेताओं के साथ एक बड़ी बैठक की लेकिन उसमें भी राहुल गांधी के सामने नेता आपस में भिड़ गए। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित कई नेता शामिल हुए।

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में पंजाब विधासनभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा नाराज हो गए और बैठक से निकल गए. उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी बात केंद्रीय नेतृत्व के सामने रख दी है।’

दरअसल निकाय चुनाव में आज आए परिणामों को लेकर प्रताप सिंह बाजवा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के ऊपर आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के कई नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व के सामने कहा कि जिसके ऊपर पूरे प्रदेश को जिताने की जिम्मेदारी है वह अपना गृह जिला भी नहीं जीत सके।

हालांकि राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष खड़गे ने हार के लिए प्रदेश अध्यक्ष को जिम्मेवार मानने से इनकार कर दिया। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल भी हाईकमान के निर्णय के पक्ष में थे।

बीजेपी ने बदला प्रदेश अध्यक्ष

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के नेताओं और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक बुलाई थी। यह बैठक ऐसे समय पर हुई जब बीजेपी ने हाल ही में कांग्रेस से बीजेपी में आए सुनील जाखड़ को हटाकर, कांग्रेस के पूर्व नेता केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब बीजेपी का नया अध्यक्ष बनाया। बैठक का मुख्य फोकस पंजाब कांग्रेस को मजबूत करना और पार्टी के भीतर के आपसी मतभेदों को सुलझाकर सभी नेताओं को एकजुट करना है, लेकिन बैठक के बीच ही मतभेद खुलकर सामने आ गए।

कांग्रेस का धांधली का आरोप

राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कांग्रेस को मिला झटका और भी चौंकाने वाला था। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग से जुड़े कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले गिद्दड़बाहा नगर परिषद में कांग्रेस सिर्फ 19 में से 2 सीटें ही जीत पाई, जबकि AAP ने 17 सीटें झटक लीं।

परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए वडिंग ने कहा कि पार्टी का प्रदर्शन “सराहनीय” है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस उम्मीदवारों के लगभग 750 नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए, जिसका नतीजे पर काफी असर पड़ा।वडिंग ने कहा कि पटियाला, लुधियाना, अमृतसर और जालंधर में नगर निगम चुनाव हुए। इनमें हमारा प्रदर्शन सराहनीय रहा। पूरे पंजाब में 750 दस्तावेज खारिज किए गए। AAP ने 595 सीटें जीतीं।

उन्होंने 80 सीटों पर बिना मुकाबला के जीत हासिल की… ये वे सीटें हैं जहां कागजात खारिज कर दिए गए और उम्मीदवार बिना लड़े निर्विरोध जीत गए।

आप की जबरदस्त सफलता

राजा वडिंग सत्तारूढ़ पार्टी पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने और चुनाव के दौरान ‘साम, दाम, दंड, भेद’ नीति अपनाने का भी आरोप लगाया। मुख्यमंत्री भगवंत मान और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने परिणामों को राज्य सरकार के लिए मजबूत समर्थन बताया।

मान ने कहा कि मतदाताओं ने ‘नफरत की राजनीति’ और विभाजनकारी राजनीति को खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि AAP का कुल आंकड़ा कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल के कुल आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।

मान ने कहा कि AAP ने लगभग 890 सीटें हासिल कर ली हैं और बाकी वार्डों के नतीजे अभी बाकी हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी 1,000 सीटों का आंकड़ा पार कर लेगी।मनीष सिसोदिया ने भी कहा कि नतीजे पंजाब में “ED की राजनीति” को मतदाताओं द्वारा खारिज किए जाने को दर्शाते हैं।

अनियमितताओं के आरोप

26 मई को पंजाब में 75 नगर परिषदों और 20 नगर पंचायतों के लिए मतदान हुआ था, जिसमें 7,555 उम्मीदवार मैदान में थे। AAP ने 1,801, कांग्रेस ने 1,550, भाजपा ने 1,316 और शिरोमणि अकाली दल ने 1,251 उम्मीदवार उतारे थे।ये नतीजे पंजाब में कांग्रेस की शहरी आधार को वापस हासिल करने की लगातार संघर्ष को रेखांकित करते हैं, भले ही वह राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी और पूर्व सत्तारूढ़ दल बनी हुई हो। साथ ही पार्टी ने चुनाव कराने में प्रक्रियागत अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं।

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