रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के डीएड (D.El.Ed.) योग्य अभ्यर्थियों का आमरण अनशन आज 49वें दिन में प्रवेश कर गया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उच्च न्यायालय बिलासपुर और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद राज्य सरकार ने लगभग 2300 रिक्त पदों पर उनकी नियुक्ति नहीं की है। अभ्यर्थियों ने बताया कि 2621 बीएड अभ्यर्थियों को बर्खास्त करने के बाद उनके स्थान पर डीएड अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के बजाय बीएड वालों को विज्ञान प्रयोगशाला में समायोजित कर दिया गया, जो न्यायालय की अवहेलना है।
उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025 को तथा सर्वोच्च न्यायालय ने 28 अगस्त 2024 को राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।अभ्यर्थियों ने कई बार ज्ञापन और आवेदन दिए, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। 17 दिसंबर 2025 को विधानसभा में विधायक रीकेस सेन के सवाल पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि नियुक्ति की कोई समय-सीमा नहीं बताई जा सकती, जिससे अभ्यर्थियों में गहरा आक्रोश है।

अनशन 24 दिसंबर 2025 से तूता, रायपुर में चल रहा है और आज 4 अभ्यर्थियों को स्वास्थ्य बिगड़ने पर अस्पताल रेफर किया गया। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और सिर्फ न्यायालय आदेशों के पालन की मांग है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि किसी अभ्यर्थी की हालत बिगड़ती है या कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी और डीपीआई संचालक ऋतुराज रघुवंशी सहित शासन-प्रशासन की होगी।
डीएड अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार से तत्काल मांग की है कि वह न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए शेष 2300 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करे ताकि हजारों योग्य युवाओं को उनका हक मिल सके और वे मानसिक-अर्थिक संकट से बाहर निकल सकें। द लेंस इस मुद्दे पर लगातार ख़बरें दिखाता रहा है और अभ्यर्थियों से उनकी तकलीफें तुता स्थल पर सुना है।











