आवेश तिवारी। नई दिल्ली
यह कहानी कम लोगों को पता होगी आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में टैरिफ को लेकर ऐतिहासिक फैसला देने वाले चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स और हिंदुस्तान के टॉप वकील कपिल सिब्बल एक साथ पढ़े हैं ।
दोनों ने ही हार्वर्ड लाँ स्कूल में एक साथ पढ़ाई पूरी की। कपिल सिब्बल ने 1977 में वहाँ से एल एल एम की डिग्री ली तो जॉन रॉबर्ट्स ने जे डी यानि कि ज्यूडिस डॉक्टर की डिग्री ली। दिलचस्प है कि जॉन रॉबर्ट्स चीफ जस्टिस बन गए कपिल सिब्बल एक वक्त जरूर भारत के कानून मंत्री बने लेकिन उन्होंने वकालत जारी रखी।
जॉन रॉबर्ट्स एक पत्रकार भी रहे हैं वो हार्वर्ड लॉ रिव्यू के प्रबंधक संपादक भी थे।जॉन ग्लोवर रॉबर्ट्स जूनियर संयुक्त राज्य अमेरिका के 17वें और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश हैं। वे 2005 से अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का नेतृत्व कर रहे हैं।
सबसे कम उम्र में बने सीजेआई
रॉबर्ट्स ने अपने करियर में न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं।उन्होंने अमेरिका के प्रसिद्ध न्यायाधीश हेनरी फ्रेंडली और बाद में विलियम रेनक्विस्ट जो बाद मुख्य न्यायाधीश बने के अधीन काम किया है ।
रीगन और जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश प्रशासनों के दौरान उन्होंने न्याय विभाग और व्हाइट हाउस में वकील के रूप में कार्य किया। एक वक्त वे अमेरिका के सबसे प्रभावशाली अपीलीय वकीलों में से एक माने जाते थे, जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 39 बार दलीलें पेश कीं।
2003 में उन्हें कोलंबिया डिस्ट्रिक्ट की अपील कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया गया।50 वर्ष की आयु में, वे पिछले 200 वर्षों में चीफ जस्टिस के पद पर बैठने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति बने।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता के पक्षधर
जॉन रॉबर्ट्स को आमतौर पर एक रूढ़िवादी न्यायविद माना जाता है, लेकिन वे अपनी संस्थागत निष्पक्षता के लिए भी जाने जाते हैं।
वे अक्सर अदालतों को बड़े राजनीतिक फैसलों से दूर रखने की वकालत करते हैं।उन्होंने ‘ओबामाकेयर’ को बरकरार रखने में निर्णायक वोट दिया था, जिसने कई रूढ़िवादियों को आश्चर्यचकित कर दिया था। वे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जनता के बीच इसकी साख बनाए रखने पर बहुत जोर देते हैं।
रॉबर्ट्स ने दो अमेरिकी राष्ट्रपतियों बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ चल रही महाभियोग की कार्यवाही की अध्यक्षता भी की है।
भारतीय मूल के जजों की भी महत्वपूर्ण भूमिका
इस मामले की पिछली सुनवाई और निचली अदालतों (DC Circuit) की कार्यवाही में भारतीय मूल की जज नीमी राव और मुख्य न्यायाधीश श्री श्रीनिवासन शामिल रहे हैं, जिन्होंने इस कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कोर्ट ने ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ’पारस्परिक शुल्क को अवैध घोषित कर दिया है। इससे भारत से अमेरिका जाने वाले लगभग 55% निर्यात पर लगा 18% अतिरिक्त शुल्क खत्म हो जाएगा।









