रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग Chhattisgarh State Commission for Women ने आज कई महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई की और सख्त फैसले सुनाए। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर 175वीं और रायपुर जिले में 361वीं जनसुनवाई हुई। इनमें महिला उत्पीड़न, भरण-पोषण, अनुकंपा नियुक्ति और वेतन घोटाले जैसे गंभीर मामले शामिल थे।
12 नर्सों का 70-80 लाख रुपये वेतन घोटाला

ESIC अस्पताल, रायपुर में काम करने वाली 12 नर्सों ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि दो साल पहले अनुग्रह प्रो. विजार्ड बिजनेस सॉल्यूशन नामक एजेंसी के जरिए उनकी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्ति हुई थी। उनका वेतन 40-48 हजार रुपये महीना था लेकिन उन्हें सिर्फ आधा पैसा ही मिलता था। बाकी आधा पैसा एजेंसी, अस्पताल और यूको बैंक (डीडी नगर शाखा) की मिलीभगत से निकाल लिया जाता था।
नर्सों के अनुसार वेतन आने के दिन बैंक मैनेजर के साथ ठेकेदार भी बैठे रहते थे। वेतन मैसेज आते ही अगले ही मिनट में खाते से आधा पैसा कट जाता था। दो साल में लगभग 70-80 लाख रुपये का घोटाला हुआ। उन्हें दो साल का अनुभव प्रमाण पत्र भी नहीं दिया गया।
आयोग ने मामले को बहुत गंभीर माना और सभी संबंधित पक्षों (एजेंसी, अस्पताल और बैंक) को अगली सुनवाई में अनुभव प्रमाण पत्र लेकर पेश होने का निर्देश दिया। साथ ही, उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधीक्षक के माध्यम से बुलाने का आदेश दिया गया।
एक अन्य मामले में आवेदिका ने बताया कि उनकी बेटी एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी और कॉलेज प्रबंधन की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली। आवेदिका का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन घटना को दबाने की कोशिश कर रहा है। आयोग ने पूछताछ की, कॉलेज ने सीसीटीवी फुटेज की जांच साइबर से नहीं कराई। गर्ल्स हॉस्टल में लड़का कब और कैसे घुसा, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आयोग को लगा कि कॉलेज कुछ तथ्य छिपा रहा है या लड़के को बचाने का प्रयास कर रहा है। इसलिए कॉलेज प्रबंधन को आदेश दिया गया कि अगली सुनवाई में स्पष्ट स्थिति बताए और सीसीटीवी फुटेज लेकर पेश हो।
अन्य महत्वपूर्ण फैसले
भाई द्वारा बहन को परेशान करने का मामला – एक महिला को 2013 में मां की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति मिली। उसका बड़ा भाई अब अपनी पत्नी को उसकी जगह नियुक्त कराने के लिए बहन को परेशान कर रहा है। आयोग ने भाई को निर्देश दिया कि वह नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है, लेकिन बहन को परेशान नहीं करे। अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी।

तलाक के बाद बच्चों से मिलने का मामला – एक दंपति ने खुलानामा से तलाक लिया। समझौते के अनुसार 3 साल की बेटी पिता के पास और डेढ़ साल की बेटी मां के पास। लेकिन दोनों बच्चियों से मिलने नहीं दिया जा रहा। आयोग ने दोनों पक्षों को महीने में दो बार आयोग में बच्चों को लेकर आने का निर्देश दिया। 6 महीने तक इसकी निगरानी आयोग करेगा।
ननंद के कारण वैवाहिक कलह – एक महिला ने बताया कि उसकी ननंद दो साल से उसके घर में रह रही है, जिससे पति-पत्नी में झगड़े बढ़ गए। 14 साल के बेटे का पालन-पोषण मुश्किल हो रहा है। आयोग ने समझाया कि घर के दो कमरे ननंद और पति के लिए, दो कमरे पत्नी-बेटे के लिए अलग रखें। दोनों मिलकर बेटे की जिम्मेदारी लें। अगर ननंद अलग घर ले ले तो रिश्ता सुधर सकता है।
पति द्वारा दूसरी महिला से संबंध – एक महिला ने बताया कि पति दूसरी महिला के साथ रहता है। तीन बेटियां उसके साथ हैं। संपत्ति का केस कोर्ट में चल रहा है। आयोग ने भरण-पोषण के लिए बच्चों की तरफ से केस करने की सलाह दी और प्रकरण नस्तीबद्ध किया।
आयोग ने सभी मामलों में पक्षों को समझाने और कानूनी रास्ता अपनाने पर जोर दिया। अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि महिला अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग हर कदम पर सख्त रहेगा। वेतन घोटाला और छात्रा आत्महत्या जैसे गंभीर मामलों में जल्द कार्रवाई होगी।








