छत्तीसगढ़ महिला आयोग ने 3 दिन में 68 मामले निपटाए, नर्सों के 70 लाख घोटाले ब्रांच मैनेजर से मांगे गए CCTV फुटेज

February 12, 2026 6:43 PM

रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग Chhattisgarh State Commission for Women ने 9 से 11 फरवरी 2026 तक तीन दिनों तक महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने रायपुर मुख्यालय पर कुल 150 मामलों की जांच की, जिसमें से 68 मामले पूरी तरह निपटाए गए। प्रदेश स्तर पर 177वीं और रायपुर जिले में 363वीं जनसुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, आयोग ने पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए सख्त रुख अपनाया और कई मामलों में समझौता करवाया।

एक बड़े मामले में ईएसआईसी अस्पताल, रायपुर की 13 नर्सों ने शिकायत की कि उन्हें एजेंसी ‘अनुग्रिह प्रो. विजार्ड बिजनेस सॉल्यूशन’ के जरिए दो साल पहले नर्सिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया था। उनका वेतन 40 से 48 हजार रुपये था, लेकिन उन्हें आधा ही मिलता था।

नर्सों का आरोप है कि यूको बैंक डीडी नगर ब्रांच, एजेंसी और अस्पताल की मिलीभगत से हर महीने आधा वेतन एटीएम से निकाल लिया जाता था। इस तरह लगभग 70-80 लाख रुपये का घोटाला हुआ। आयोग ने ब्रांच मैनेजर से CCTV फुटेज 10 दिनों में मंगवाया और सभी पक्षों को पुलिस के जरिए अगली सुनवाई में हाजिर होने का आदेश दिया।

एक अन्य मामले में एक महिला ने शिकायत की कि उसके पति की मौत के बाद ससुराल पक्ष ने उसे छोड़ दिया। आयोग की समझाइश पर ससुराल वालों ने विवाह के समय दिए गए गहने, सामान, 2 लाख रुपये नकद और 3 लाख रुपये भरण-पोषण के लिए एक मुश्त चेक महिला को लौटा दिए। प्रकरण निपट गया। एक अलग मामले में दो बहनों के बीच संपत्ति विवाद था।

बड़ी बहन ने महासमुंद में अपनी कमाई से मकान बनवाया था। छोटी बहनों ने 5 लाख रुपये दिए थे, लेकिन मकान बड़ी बहन के नाम पर है। आयोग ने समझाया कि छोटी बहनें चाहें तो कोर्ट में दावा कर सकती हैं, लेकिन मालिकाना हक पर सवाल नहीं उठा सकतीं। प्रकरण बंद कर दिया गया।

एक किराया विवाद में महिला ने बताया कि उसने अपना मकान किराए पर दिया था, लेकिन किराएदार बिना किराया दिए मकान खाली कर चला गया और बिजली बिल भी नहीं भरा। आयोग की समझाइश पर किराएदार ने 10 दिनों में 52 हजार रुपये (किराया + बिजली बिल) देने पर सहमति जताई।

एक सामाजिक बहिष्कार के मामले में आयोग ने दोनों पक्ष सुने और स्पष्ट किया कि बहिष्कार का कोई प्रमाण नहीं है, इसलिए प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया गया। आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक ने कहा कि आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रहा है। महिला अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग हर कदम पर सख्त रहेगा। वेतन घोटाला और अन्य गंभीर मामलों में जल्द कार्रवाई होगी।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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