रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग (Chhattisgarh Rajya Mahila Ayog) ने आज अपनी जनसुनवाई में कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला सुनाया। इनमें कोंडागांव जिले की एक आदिवासी महिला का मामला सबसे चर्चित रहा, जहां समाज ने जाति के आधार पर उसके वैवाहिक जीवन पर रोक लगाने की कोशिश की थी। आयोग ने इस सामाजिक बहिष्कार को खत्म करवाया और पीड़िता को न्याय दिलाया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में हुई इस सुनवाई में प्रदेश स्तर पर 358वीं और रायपुर जिले में 174वीं जनसुनवाई आयोजित की गई।
आदिवासी महिला का सामाजिक बहिष्कार मामला
कोंडागांव की इस आदिवासी महिला ने शिकायत की थी कि एक ही जाति में शादी करने के कारण समाज के लोगों ने उसे और उसके पति को दबाव डाला। उन्हें गांव से निकालने की धमकी दी गई और सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। पिछली सुनवाई में आयोग ने समाज के लोगों को समझाया था कि वे महिला से लिया गया सामाजिक दंड वापस करें। आज की सुनवाई में समाज के प्रतिनिधियों ने आयोग के सामने 60 हजार रुपये नगद लौटा दिए।
महिला के पति ने आयोग के समक्ष स्पष्ट कहा कि वे अपनी पत्नी के साथ वैवाहिक जीवन जारी रखना चाहते हैं। समाज के सभी लोगों ने वादा किया कि वे आगे से कभी विवाह तोड़ने की कोशिश नहीं करेंगे और बहिष्कार भी नहीं करेंगे। आयोग ने सख्त निर्देश दिया कि यदि भविष्य में ऐसा कोई प्रयास हुआ तो महिला थाने में FIR दर्ज करा सकेगी। इस फैसले के बाद मामला नस्तीबद्ध (समाप्त) कर दिया गया।

कार्यस्थल पर उत्पीड़न का मामला
एक अन्य मामले में कोंडागांव की एक महिला कर्मचारी ने अपने बड़े अधिकारी पर कार्यस्थल पर परेशान करने का आरोप लगाया। महिला ने बताया कि अधिकारी अवकाश पर व्हाट्सएप से कारण बताओ पत्र जारी करता था और ऑफिस टाइम के बाद भी मैसेज कर परेशान करता था।दोनों पक्षों ने बताया कि मामला फिलहाल कोंडागांव कलेक्टर द्वारा जांच के अधीन है। आयोग ने निर्देश दिया कि जांच रिपोर्ट की प्रमाणित कॉपी लेकर दोनों पक्ष दोबारा पेश हों, ताकि मामले का स्थायी निराकरण हो सके।
भाटापारा सरकारी अस्पताल में कार्यरत एक नर्स ने शिकायत की कि एक मरीज के परिजन ने ड्यूटी हैंडओवर न करने पर दुर्व्यवहार किया और बार-बार परेशान किया। आयोग की समझाइश पर आरोपी ने भविष्य में ऐसा न करने का वादा किया। आयोग ने महिला को आश्वासन दिया कि दोबारा शिकायत हुई तो FIR दर्ज हो सकेगी। एक मामले में पत्नी ने दहेज के लिए परेशान करने की शिकायत की। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक के बदले 15 लाख रुपये एकमुश्त भरण-पोषण देने पर राजी हो गए।
डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि महिला आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जाती है ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय मिल सके।









