रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले से संबंधित केस में पूर्व मंत्री व मौजूदा विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार को राहत मिल गई है। उनकी जमानत मंजूर कर दी गई है। लखमा 378 दिनों से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 15 जनवरी 2025 को उन्हें गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में जेल में थे।
ईडी का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में कथित तौर पर 2161 करोड़ के शराब घोटाले में लिप्त सिंडिकेट में कवासी लखमा शामिल थे। आरोप है कि कथित तौर पर एक सिंडिकेट को लाभ पहुंचाने के लिए राज्य की शराब नीति में बदलाव किया गया था। कवासी लखमा तब 2019 से 2023 तक आबकारी मंत्री थे और उनके खिलाफ दायर आरोप पत्र में कहा गया कि श्री लखमा ने अपने पद का दुरुपयोग किया था।
खबर है कि स्थानीय अदालतों से जमानत न मिलने पर कवासी लखमा की जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां मंगलवार को ढाई घंटे सुनवाई उन्हें अंतरिम जमानत मिली है।
ईडी ने अदालत में पेश किए गए प्रमाणों में पूर्व मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि लखमा इस सिंडिकेट का प्रमुख सदस्य थे और घोटाले की साजिश उनके मार्गदर्शन और सुरक्षा में ही चल रही थी।
इस मामले में कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कवासी लखमा को भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर षड्यंत्रपूर्वक ‘कथित शराब घोटाले’ में फंसाया गया। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ आदिवासी नेता को महीनों तक जेल की सलाखों के पीछे राजनीतिक विद्वेष के कारण बंद करके रखा गया था।









