बिलासपुर| छत्तीसगढ़ में बिजली के करंट से लगातार हो रही हाथियों और अन्य वन्यजीवों की मौत को लेकर हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने गंभीर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की युगल पीठ ने 7 अप्रैल को इस जनहित याचिका की सुनवाई की। याचिका में रायपुर के नितिन सिंघवी ने विभिन्न समाचार पत्रों की कतरनें पेश कर कोर्ट का ध्यान घटनाओं की ओर दिलाया।
मार्च 2026 में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में कई दुखद घटनाएं हुईं –
12 मार्च: रायगढ़ जिले के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र में दो हाथी शावकों की बिजली करंट लगने से मौत हो गई।
14 मार्च: सूरजपुर जिले के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में खेत में लगाए गए करंट वाले तार की चपेट में आने से एक हाथी की मौत हो गई।
मार्च में ही सारंगढ़-भिलाईगढ़ क्षेत्र में जंगली सूअर के शिकार के लिए लगाए गए अवैध बिजली करंट से एक युवक की मौत हो गई।
26 मार्च: मैनपाट क्षेत्र में जंगली जानवरों के शिकार के लिए बिछाए गए तरंगित तार से एक युवक और एक लोमड़ी की मौत हो गई।
कोरबा जिले के सकोदा जंगल में 11 kv करंट वाले तार की चपेट में आने से एक मादा भालू और उसके दो शावकों की मौत हो गई।
ये घटनाएं जंगलों के आसपास खेतों में अवैध बिजली तार लगाने, शिकार के लिए करंट का दुरुपयोग और लापरवाही के कारण हो रही हैं।


कोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से शपथ पत्र मांगा है। इसमें पूछा गया है कि उपरोक्त घटनाएं किन परिस्थितियों में हुईं? वन विभाग और संबंधित अधिकारियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है? भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं? कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 मई 2026 को तय की है।
क्यों है यह मुद्दा गंभीर?
छत्तीसगढ़ में हाथी और अन्य वन्यजीवों की करंट से मौत की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जंगलों के किनारे खेती करने वाले किसान फसलों की सुरक्षा के लिए कभी-कभी अवैध रूप से बिजली का तार लगाते हैं। वहीं कुछ लोग शिकार के लिए भी करंट का गलत इस्तेमाल करते हैं। इससे न सिर्फ वन्यजीवों की जान जा रही है, बल्कि इंसानों की भी जान खतरे में पड़ रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी जैसे बड़े जानवर पानी पीने या चरते समय अक्सर इन तारों की चपेट में आ जाते हैं। याचिका में एक्टिविस्ट नितिन सिंघवी ने कहा कि वन विभाग और बिजली विभाग की लापरवाही से ये मौतें हो रही हैं। उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि राज्य सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले और प्रभावी उपाय करे।









