रायगढ़ और धर्मजयगढ़ बने हाथियों के ‘कब्रगाह, तीन साल में 38 हाथी मरे, 562 अन्य वन्यजीवों की मौत

Chhattisgarh Assembly Budget Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में वन्यजीवों की मौत के आंकड़े सामने आए हैं, जो चिंता का विषय बने हैं। वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश के लिखित सवाल के जवाब में बताया कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 तक प्रदेश में कुल 9 बाघों और 38 हाथियों की मौत हुई है। इसके अलावा 562 अन्य जंगली जानवरों की अस्वाभाविक मौतें दर्ज की गई हैं। हाथियों की मौत में सबसे ज्यादा मामला बिजली के करंट से जुड़ा है। 14 हाथी करंट लगने से मारे गए।

रायगढ़ और धर्मजयगढ़ को हाथियों का ‘कब्रगाह’ कहा जा रहा है, रायगढ़ में 10 और धर्मजयगढ़ में 8 हाथियों की मौत हुई। अन्य जिलों में बलरामपुर में 5, सूरजपुर में 4 हाथी मरे। साल 2024 में सबसे ज्यादा 18 हाथियों की मौत हुई, जबकि 2025 में 16 और 2026 में अब तक 2 हाथी मरे। मौतें रायगढ़, कोरबा, बलरामपुर, सूरजपुर, धमतरी, बिलासपुर और कटघोरा जैसे इलाकों में हुईं।बाघों की मौत का आंकड़ा भी चिंताजनक है। बीते दो सालों में कुल 9 बाघ मरे, 2024 में 1, 2025 में 6 और 2026 में अचानकमार टाइगर रिजर्व में 1 बाघ की मौत हुई।

यह जानकारी विधानसभा में लिखित जवाब के रूप में दी गई, जिससे वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार ने इन मौतों के कारणों की जांच और रोकथाम के उपायों पर काम करने का संकेत दिया है, लेकिन विपक्ष इसे गंभीर चुनौती बता रहा है। बिजली के अवैध तार, खेती-बाड़ी और जंगल कटाई जैसे कारणों से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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