रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के 5वीं और 8 वीं की बोर्ड परीक्षा कराए जाने के निर्णय के खिलाफ निजी स्कूलों ने हाइकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिस पर हाइकोर्ट ने निजी स्कूलों को राहत दी है, साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग को नियमों में मनमानी करने के लिए फटकार लगाई है । अब राज्य सरकार 5वीं और 8 वीं की बोर्ड परीक्षा नहीं लेगी।
हाइकोर्ट की स्कूल शिक्षा विभाग को फटकार
छत्तीसगढ़ सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत 5वीं, 8 वीं कक्षा की परीक्षा बोर्ड कराने के निर्णय के खिलाफ निजी विद्यालय एसोशिएसन सहित दो अन्य याचिकाओं पर हाइकोर्ट में ने फैसला सुनाया है। इस पर हाइकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि “निजी स्कूल 5वीं 8 वीं की बोर्ड परीक्षा कराने के लिए बाध्य नहीं हैं। बीच सेशन में आप नियम परिवर्तित नहीं कर सकते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग को नियमों के साथ मनमानी नहीं करनी चाहिए।”
बच्चों के भविष्य पर प्रभाव
नई शिक्षा नीति के तहत लिए गए इस निर्णय को लेकर द लेंस की टीम ने प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता से बात की, उन्होंने कहा कि हाइकोर्ट ने निजी स्कूल एसोसिएशन की याचिका पर हमारे पक्ष में फैसला सुनाया है। अब पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षा कराने के लिए निजी स्कूल बाध्य नहीं हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने बीच सेशन में सेलेब्स चेंज कर दिया जिससे बच्चों को परेशानी होगी। सरकारी स्कूलों में भी बच्चों को पहले 30 प्रतिशत सिलेबस आने का तय किया गया था लेकिन उसे बदल कर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। ऐसे में बच्चों के भविष्य पर सीधा असर पड़ सकता है।
नई शिक्षा नीति का पालन– स्कूल शिक्षा विभाग
हाइकोर्ट में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से अपने पक्ष में कहा गया कि हम नई शिक्षा नीति का पालन कर रहें हैं। बच्चों के भविष्य के लिए यह परीक्षा जरूरी है। निजी स्कूलों को भी परीक्षा कराने के लिए हमने निर्देशित किया था।










