बिलासपुर। भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर चल रहे विवाद ने अब न्यायालय (CG HIGH COURT ON SCOUT GUIDE PRESIDENT) का रुख कर लिया है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा पद से हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को बिलासपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूरे मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को तय की गई है।
याचिका में सांसद ने क्या आरोप लगाए?
याचिका में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पद से हटाने के फैसले को असंवैधानिक और एकतरफा बताया है।
उनके मुख्य आरोप हैं:
उन्हें हटाने से पहले कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई।
अपना पक्ष रखने या सुनवाई का कोई मौका नहीं मिला।
वे सांसद के साथ-साथ संगठन के वैधानिक अध्यक्ष हैं और लंबे समय से इस पद पर कार्यरत हैं।
5 जनवरी को उन्होंने जंबूरी आयोजन से जुड़ी बैठक भी बुलाई थी।
जंबूरी रद्द करने का फैसला और अनियमितता के आरोप
सांसद ने याचिका में बताया कि राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी (9 से 13 जनवरी 2026 तक बालोद में प्रस्तावित) में लगभग 10 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। इसी कारण उन्होंने आयोजन को रद्द करने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद उन्हें कोई जानकारी दिए बिना कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जो संगठन के नियमों के खिलाफ है। सांसद का कहना है कि उन्हें दरकिनार कर ऐसे कदम उठाए गए जो पूरी तरह गैर-कानूनी हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब स्कूल शिक्षा विभाग ने दिसंबर 2025 में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पदेन राज्य अध्यक्ष नियुक्त किया। इससे पहले बृजमोहन अग्रवाल जब वे शिक्षा मंत्री थे इस पद पर थे। दोनों नेताओं के बीच अध्यक्ष पद को लेकर दावा-प्रतिदावा चल रहा है, जिससे जंबूरी आयोजन भी विवादों में घिर गया। यह मामला अब न केवल संगठन के नियमों से जुड़ा है, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। अदालत के अंतिम फैसले से स्थिति स्पष्ट होगी।









