CG HEALTH CRISIS : छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा संकट मंडरा रहा है। राज्य के निजी अस्पतालों ने सरकार को सख्त अल्टीमेटम दिया है कि अगर आयुष्मान भारत योजना के तहत बकाया 1700 करोड़ रुपये का भुगतान 31 जनवरी तक नहीं हुआ, तो 1 फरवरी से सभी निजी अस्पतालों में इस योजना के मरीजों का इलाज बंद हो जाएगा। यह फैसला लाखों गरीब परिवारों के लिए बुरी खबर साबित हो सकता है, जो इस योजना पर निर्भर हैं।
भुगतान में देरी से अस्पतालों की हालत खराब
निजी अस्पताल एसोसिएशन के अनुसार, पिछले साल अगस्त से सरकार की ओर से कोई पैसा नहीं मिला है। एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य और डॉक्टर राकेश गुप्ता ने बताया कि इतनी बड़ी रकम अटकने से अस्पतालों का रोजाना काम चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास स्टाफ की सैलरी, दवाइयां और अन्य खर्चों के लिए पैसे नहीं बचे हैं। अगर भुगतान नहीं हुआ तो हमें मजबूरी में इलाज रोकना पड़ेगा।’ एसोसिएशन ने यह फैसला सभी अस्पतालों की मीटिंग के बाद लिया है, ताकि सरकार पर दबाव बने।

गौरतलब है कि यह योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से शुरू की थी, जिसका मकसद गरीबों को मुफ्त इलाज देना था। लेकिन अब राज्य में यह योजना लड़खड़ाती नजर आ रही है।
गरीब मरीजों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर 1 फरवरी से इलाज बंद होता है तो राज्य के लाखों परिवार प्रभावित होंगे। आयुष्मान कार्ड धारक ज्यादातर गरीब वर्ग से हैं, जो निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज पाते हैं। सरकारी अस्पतालों में पहले से ही डॉक्टरों, दवाओं और बिस्तरों की कमी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट से बचने के लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए। राज्य स्वास्थ्य मंत्री से इस पर स्पष्ट बयान की उम्मीद की जा रही है। सरकार ने अभी तक अल्टीमेटम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अगर भुगतान हो जाता है, तो संकट टल सकता है। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही चुनौतियों से जूझ रही है और यह मामला इसे और गंभीर बना सकता है।







