यूएस-ईरान Ceasefire के पीछे है चीन ?

April 8, 2026 8:34 PM

Ceasefire Controversy: पश्चिम एशिया में एक महीने से ज्यादा चले तनावपूर्ण संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम हो गया है। हालांकि पाकिस्तान ने खुद को इस समझौते का मुख्य मध्यस्थ बताया है लेकिन सूत्रों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से साफ हो रहा है कि चीन ने पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभाई। ईरान को बातचीत की मेज पर लाने और समझौते के लिए राजी करने में चीन की कूटनीति निर्णायक साबित हुई।

ट्रंप ने आखिरी समय में हमलों को रोकने का फैसला लिया, जब डेडलाइन खत्म होने में महज 90 मिनट बाकी थे। उन्होंने कहा था कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ‘एक पूरी सभ्यता आज रात मर जाएगी’ लेकिन अंत में युद्धविराम की घोषणा कर दी।

ट्रंप ने खुद माना चीन की भूमिका

इकोनोमिक टाइम्स के मुताबिक जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान को युद्धविराम पर राजी करने में चीन की मदद थी, तो उन्होंने जवाब दिया ‘मुझे हां सुनाई दिया।’ ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बातचीत का जिक्र किया, लेकिन ईरान को मनाने वाले असली खिलाड़ी के रूप में चीन का नाम सामने आया।

चीन ने क्यों किया प्रयास ?

चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार। ईरान चीन को भारी डिस्काउंट पर तेल बेचता रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से चीन की तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही थी। चीन के लिए यह जरूरी था कि तेल का सामान्य प्रवाह बहाल हो। अगर होर्मुज बंद रहता तो चीन को महंगे रूसी तेल पर निर्भर होना पड़ता, जो हाल के महीनों में और महंगा हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी अधिकारियों ने ईरान के साथ सीधी बातचीत की और उसे लचीलापन दिखाने की सलाह दी।

पाकिस्तान की भूमिका और सवाल

पाकिस्तान ने शुरुआत से ही अप्रत्यक्ष बातचीत की सुविधा दी। उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने स्वीकार किया कि दोनों पक्षों के संदेश पाकिस्तान के जरिए जा रहे थे। शहबाज शरीफ ने ट्रंप से दो सप्ताह की मोहलत मांगी और ईरान से होर्मुज खोलने का अनुरोध किया। ईरान ने भी पाकिस्तान के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया और 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। लेकिन एक पोस्ट में ‘ड्राफ्ट – पाकिस्तान के पीएम का एक्स पर संदेश’ लिखा होने से कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह संदेश पूरी तरह पाकिस्तान का अपना था।

चीन की वीटो पावर और रणनीति

युद्धविराम घोषणा से ठीक पहले चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए बल प्रयोग को अधिकृत करने वाले प्रस्ताव को वीटो कर दिया। चीन ने कहा कि ऐसा प्रस्ताव ‘आग में घी डालने’ वाला है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन ने पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किए जैसे मध्यस्थों के साथ मिलकर रणनीति बनाई। तीन साल पहले सऊदी अरब और ईरान के बीच सुलह में भी चीन की भूमिका रही थी। अब वह मध्य पूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।

10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू होने वाली बातचीत तय करेगी कि यह युद्धविराम स्थायी शांति की ओर बढ़ता है या सिर्फ अस्थायी राहत है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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