दिनदहाड़े हत्या और मॉब लिंचिंग: बिहार में पुलिस को मिले राष्ट्रपति कलर अवार्ड पर क्यों उठ रहे सवाल?

Seemanchal

9 अप्रैल 2026 को बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज में सत्तू बेच रहे ठेला चालक रवि चौहान ने वाहन चालक अली हुसैन का सिर काट दिया। इसके बाद मृतक के परिजन और आक्रोशित लोगों ने घर के पीछे छिपे आरोपी को पकड़ लिया। उसे दो किलोमीटर दूर से खींचकर उस जगह ले आए, जहां उसने युवक का सिर काटा था। उसी जगह पुलिस के सामने लाठी-डंडे से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी। इस पूरी घटना के बाद भीड़ पुलिस के सामने चिल्लाती रही ‘बिहार पुलिस मुर्दाबाद’।

मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल इस घटना के बारे में वहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि, “ठेला चालक रवि चौहान और वाहन चालक अली हुसैन साथ में गांजा पीते थे। ठेला चालक रवि चौहान अपनी पत्नी के साथ मिलकर सत्तू और अनानास बेचता था। उस रोज उसकी पत्नी नहीं आई थी। अली हुसैन ने व्यंग्य में पूछ लिया था, आज सत्तू वाली नहीं आई? इससे पहले भी उसकी पत्नी पर वह मजाक करता था। इसके बाद सत्तू वाले ने गला रेतने के लिए अनानास काटने वाले चाकू का इस्तेमाल किया था, जिसमें तेज धार होती है।”

फारबिसगंज के रहने वाले छात्र कृष्णा कुमार बताते हैं कि, “सीमांचल क्षेत्र की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। यहां बढ़ती कट्टरता और प्रतिबंधित नशे का फैलाव इन घटनाओं के पीछे एक बड़ी वजह बनकर उभर रहा है। यह जरूर कहूंगा कि मरने वाले की नियत और नियति दोनों ही खराब थी। बार-बार समझाने के बावजूद किसी की पत्नी पर टिप्पणी करना भी एक गंभीर गलती है। हालांकि यह सांप्रदायिक घटना नहीं है। यह संयोग की बात है कि दोनों में से एक हिंदू और एक मुसलमान था। राजनीति के लोग हिंदू मुस्लिम करने की कोशिश कर रहे हैं।”

तेजस्वी ने इस कांड के पीछे सामाजिक ध्रुवीकरण को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि, “सिर काटकर घूमने का दृश्य हाल ही में आई एक प्रोपेगेंडा फिल्म से प्रेरित लगता है। भाजपा सरकार अपने प्रोपेगेंडा के लिए समाज में जो जहर भर रही है, यह उसी का दिल दहलाने वाला परिणाम है। प्रधानमंत्री मोदी पांच साल बाद फिर चुनाव में आकर ‘जंगलराज’ का बेसुरा राग अलापेंगे, जबकि वर्तमान में बिहार ‘महाचौपट राज’ की भेंट चढ़ चुका है।”

पुलिस को मिला अवार्ड राजनीति से प्रभावित

हाल ही में बिहार पुलिस को ओवरआल पुलिसिंग के लिए राष्ट्रपति का कलर अवार्ड मिला है, यह देश के पुलिस या सैन्य बल को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह असाधारण सेवा, वीरता और कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार पुलिस बल को सिर्फ एक बार मिलता है, जिसे निशान के नाम से भी जाना जाता है।

राष्ट्रपति कलर अवार्ड मिलने के बाद बिहार पुलिस को एक विशेष बैज (ध्वज) भी मिलेगा, जिसे सभी सिपाही से लेकर डीजीपी रैंक तक सभी पुलिसकर्मी अपनी बाईं आस्तीन पर बाजू के पास लगाएंगे। जल्द ही बिहार पुलिस की वर्दी में यह बैज दिखाई देगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस सम्मान की जानकारी दी है।

बिहार के रहने वाले पत्रकार और लेखक परमवीर सिंह बताते हैं कि, “बिहार पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसा क्या किया है, जो पुलिस को ये अवार्ड दिया गया है। क्या बिहार पुलिस को ये अवार्ड तब नहीं दिया जाना चाहिए था जब वर्ष 2006 से वर्ष 2010 के दौरान बिहार पुलिस ने बिहार में सैकड़ों बाहुबलियों और अपराधियों को झटके में जेल के भीतर कर दिया था? क्या बिहार पुलिस को ये अवार्ड तब नहीं मिलना चाहिए था जब बिहार सरकार को सुशासन की सरकार का मीडिया और आमजन ने कहना शुरू किया था?”

वहीं युवा हल्ला बोल के संस्थापक और कांग्रेस नेता अनुपम बताते हैं कि, “पिछले कुछ वर्षों से तो बिहार में अपराध लगातार बढ़ रहा है। हाल फिलहाल की घटनाओं को देखें तो आपको शर्म होगी। 90 के बिहार से खराब स्थिति है। सुशासन बाबू के नाम से प्रसिद्ध नीतीश कुमार विदा हो रहे हैं। यहां बिहार पुलिस को ये सम्मान मिलना क्या राजनीति से प्रेरित नहीं लग रहा है?” बिहार को ये अवार्ड पहली बार मिला है। आजादी से लेकर आज तक ये अवार्ड मात्र 17 राज्य की पुलिस को मिला है।

अपराध का गढ़ बन रहा बिहार

बिहार चुनाव से पहले जंगलराज शब्द सुर्खियों में था। आंकड़ों के अनुसार राज्य में 2015 से 2024 के बीच अपराधों की संख्या में 80 प्रतिशत वृद्धि हुई। बिहार के राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से 2024 के दौरान राज्य में कुल अपराधों की संख्या में 80.2 प्रतिशत की उछाल दर्ज हुई है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि 2015 से 2022 तक औसत वृद्धि दर मात्र 23.7 प्रतिशत रही।

इंडियन एक्सप्रेस अखबार की एक रिपोर्ट बताती है कि 2015 से प्रत्येक वर्ष (2020 की कोरोना महामारी और 2024 को छोड़कर) बिहार में अपराधों की संख्या बढ़ती गई है, और कुल अपराध दर के मामले में यह राज्य देश के दस सबसे बदतर राज्यों में शुमार रहा। आईपीएस अफसर रहे जय प्रकाश सिंह के अनुसार बिहार में पिछले 10 वर्षों में 80 हजार से एक लाख तक केस पेंडिंग हैं, जिसमें वारंट जारी किया गया है। कुर्की-जब्ती के 10-15 हजार मामले तामील नहीं हुए। इस कारण भी अपराधियों का मनोबल बढ़ता है।

बिहार में हो रहे चुनाव के बीच जब एनडीए प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थक ने दुलारचंद यादव की हत्या की तो एक इंटरव्यू के दौरान देश के गृह मंत्री ने जवाब दिया था कि इस तरह की छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं। मध्यवर्ती चुनाव में घटी यह घटना काफी सुर्खियों में रही थी। इस चुनाव के बाद राज्य में कई सालों के बाद गृह विभाग भाजपा नेता और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास है।

इसके बाद भी हत्या और अपराध का सिलसिला लगातार जारी है। बिहार में हाल के दिनों में हत्या की बढ़ती घटनाओं ने न केवल राज्य और देश, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। पिछले महीने 26 मार्च को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला नालंदा में तीन युवकों ने भीड़ के सामने कथित तौर पर सार्वजनिक रूप से 20 वर्षीय महिला के साथ छेड़छाड़ की और बलात्कार का प्रयास किया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है।

इससे पहले जनवरी 2026 में बिहार की राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली जहानाबाद की एक मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे देश में सनसनी मचा दी थी। इस पूरी घटना में सबसे ज्यादा बदनाम बयान बदलती बिहार पुलिस हुई थी।

सुशासन बाबू के नाम से प्रसिद्ध बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एमएलसी पद से इस्तीफे के बाद पूरे राज्य में सियासी हलचल है। उनके गृह जिला नालंदा के कल्याण बिगहा गांव के ग्रामीण अभिनव कुमार बताते हैं कि, “अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहेंगे, तो बिहार में सुशासन की जगह कुशासन हावी हो जाएगा। राज्य को सही दिशा देने वाला नेता अगर कोई है, तो वह सिर्फ नीतीश कुमार ही हैं। बीजेपी नीतीश कुमार जैसी छवि और सुशासन कायम नहीं रख पाएगी।”

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