लेंस न्यूज़ । विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद, मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और आयोग के भीतर गुटबाजी के दावों के बीच देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार Gyanesh Kumar अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक और संवैधानिक दबाव का सामना कर रहे हैं। दिल्ली में जारी उग्र राजनीतिक घमासान का असर अब उनके राष्ट्रीय दौरों पर स्पष्ट दिखने लगा है।
उत्तर प्रदेश (मेरठ-वाराणसी), उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बाद अब उनका दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा भी ऐन मौके पर टालना पड़ा है। जानकारी ये भी है कि कल आगरा में उनके मां बाप ने सुन्दरकांड और शुद्धिकरण कराया था। एक तरफ दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के सांसद उनके इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर डटे हैं, वहीं दूसरी तरफ आयोग द्वारा एक के बाद एक राज्यों की यात्राएं रद्द हो रहीं हैं।
छत्तीसगढ़ दौरे का ब्योरा
प्रस्तावित तारीखें: 7 और 8 अक्टूबर।
अतिथि दर्जा: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘स्टेट गेस्ट’ (राजकीय अतिथि) घोषित।
सुरक्षा व्यवस्था: रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से लेकर यात्रा रूटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम।
प्रमुख कार्यक्रम व स्थल:
चुनाव तैयारियों व प्रशासनिक समीक्षा बैठकें।
दंतेवाड़ा का सुप्रसिद्ध दंतेश्वरी माता मंदिर।
बस्तर का प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात (Watervall)।
कबीरधाम (कवर्धा) जिले का ऐतिहासिक ‘भोरमदेव मंदिर’।
स्थगन का कारण : राज्य मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में केवल ‘अपरिहार्य कारण’ (Unavoidable Reasons) बताया गया।
दिल्ली का घमासान और लगातार टलते राज्य दौरे
दंतेश्वरी माता के दर्शन और बस्तर दौरे की सभी प्रोटोकॉल तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन जब दिल्ली में संसद भवन से निर्वाचन सदन की ओर बढ़ते विपक्षी नेताओं और पुलिस के बीच टकराव चल रहा था, तब रायपुर प्रशासन को दौरा स्थगित होने की सूचना मिली।
ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा रद्द होना कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले उनके उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल और लद्दाख जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के कार्यक्रम भी इसी तरह अचानक टाल दिए गए थे। चुनावी तैयारियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इन राज्यों में चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व का न पहुंच पाना यह दर्शाता है कि दिल्ली में जारी विवादों का प्रभाव अब आयोग की देशव्यापी कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है।
ज्ञानेश कुमार के हालिया तीर्थस्थलों के दर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल के महीनों में कई प्रमुख मंदिरों के दर्शन किए हैं, जिनमें जुलाई 2026 में मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग शामिल हैं जहां उन्होंने परिवार के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना की, शयन आरती में भाग लिया और बताया कि साल 2003 में लिया गया 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का 23 साल पुराना संकल्प अब पूरा हो गया है, इससे पहले मई 2026 में आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन किए और वकुला मठ समेत अन्य मंदिरों में भी पूजा की, जून 2026 में अपने पैतृक शहर आगरा के कैलाश महादेव मंदिर में पत्नी और माता-पिता के साथ शिव की आराधना की तथा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में बज्रेश्वरी देवी और धर्मशाला में चामुंडा देवी मंदिर में माथा टेका, इसके अलावा दिसंबर 2025 में अयोध्या में रामलला व हनुमानगढ़ी, जनवरी 2026 में देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम और अगस्त 2026 में सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में माता जानकी के दर्शन किए, जबकि अक्टूबर 2026 में छत्तीसगढ़ की प्रस्तावित यात्रा जिसमें दंतेश्वरी माता और भोरमदेव मंदिर शामिल थे उसे अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दिया गया।
चारों तरफ से कैसे घिरते जा रहे हैं ज्ञानेश कुमार?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस समय केवल विपक्षी हमलों का सामना नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनकी अपनी साख, निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। उनके घिरने के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं :
SIR और फॉर्म-6 पर गंभीर आरोप: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान लाखों योग्य मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से काटने और फॉर्म-6 में संदिग्ध बदलाव के आरोप लग रहे हैं।
आयोग के भीतर खींचतान का दावा: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, SIR जैसे बड़े फैसलों को लेकर खुद चुनाव आयोग के भीतर और अन्य चुनाव आयुक्तों के साथ ज्ञानेश कुमार के मतभेद की खबरें सामने आई हैं।
सड़कों पर उतरा विपक्ष: राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और इंडिया गठबंधन के सैकड़ों सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। सीधे तौर पर इस्तीफे की मांग की जा रही है।
बार-बार रद्द होते राज्य दौरे: उत्तर प्रदेश (मेरठ व वाराणसी), उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और अब छत्तीसगढ़ एक के बाद एक राज्यों के दौरे रद्द होने से आयोग की प्रशासनिक साख पर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर यूपी और उत्तराखंड जैसे राज्यों में, जहां आगामी समय में चुनाव प्रस्तावित हैं, दौरों का टलना गंभीर चिंता का विषय है।
संस्थागत साख पर ‘इमरजेंसी’ जैसे हालात
भारतीय चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्था के इतिहास में ऐसा कम ही देखा गया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ देशव्यापी पैमाने पर इस्तीफे की मांग को लेकर इस तरह का उग्र प्रदर्शन हो रहा हो और आयोग प्रमुख के राज्य दौरे एक-एक करके रद्द हो रहे हों।
ज्ञानेश कुमार के सामने इस समय दोहरी चुनौती है :
- संवैधानिक मर्यादा और जनता के विश्वास को बहाल करना: मतदाता सूचियों की शुचिता और SIR प्रक्रिया पर लगे संदेह को दूर करना उनकी पहली प्राथमिकता है।
- सड़क से लेकर अदालत तक का घेराव: एक तरफ सड़कों पर राजनीतिक प्रदर्शन चल रहे हैं, तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में भी आयोग की कार्यप्रणाली को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर की जा रही हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय के पत्र में भले ही केवल ‘अपरिहार्य कारण’ लिखा गया हो, लेकिन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल के बाद अब छत्तीसगढ़ दौरा टलना यह संकेत दे रहा है कि ज्ञानेश कुमार इस समय प्रचंड संवैधानिक और राजनीतिक दबाव में हैं।







