Bargi Dam Cruise Accident: जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए क्रूज हादसे में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जबलपुर जिला कोर्ट ने मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने क्रूज कैप्टन समेत क्रू मेंबर्स के खिलाफ 48 घंटे के भीतर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। लेकिन, सवाल यह उठता है कि आखिर उन अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी जिनका काम सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना है?
कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
जबलपुर कोर्ट ने बरगी डैम हादसे में क्रूज के पायलट और स्टाफ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। जेएमएफसी डी.पी. सूत्रकार ने मामले पर क्रूज पायलट और क्रू मेंबर्स पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि ‘पायलट ने लापरवाहीपूर्वक क्रूज चलाया, जिसके कारण हादसा हुआ और कई लोगों की मौत हो गई। पायलट क्रूज की गतिविधियों से परिचित था, लेकिन वह उसमें सवार लोगों को डूबता छोड़कर सुरक्षित बाहर निकल गया। यह भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 106 तथा धारा 110 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है’
FIR दर्ज होने से मिलेगा सबक
कोर्ट ने अखबारों और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को आधार बनाते हुए कहा ‘यदि इस मामले में FIR दर्ज नहीं की गई और जांच नहीं हुई, तो भविष्य में भी क्रूज या नाव चलाने वाले लोग किसी अनहोनी की स्थिति में यात्रियों को डूबता छोड़ सकते हैं। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है’
मदद करने वालों की पीठ थपथपाई
एक तरफ जहां कोर्ट ने पायलट की बेरहमी पर नाराजगी जाहिर की, वहीं दूसरी ओर उन जांबाज मजदूरों की जमकर तारीफ भी की, जिन्होंने अपनी जान को जोखिम में डालकर डूबते हुए यात्रियों को बचाया। कोर्ट ने बरगी थाना प्रभारी को आदेश दिया है कि वह चालक और अन्य दोषी सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज कर जल्द से जल्द सूचित करें।
ये है धारा 106 तथा धारा 110 का मतलब
कानून के जानकारों के मुताबिक भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 कहती है कि किसी व्यक्ति की लापरवाही या उतावलेपन के कारण मृत्यु होना। वहीं धारा 110 का मतलब है कि यह उन मामलों पर लागू होती है जहां किसी व्यक्ति की मृत्यु तो हुई है, लेकिन वह ‘हत्या’ की श्रेणी में नहीं आता। इसे “गैर-इरादतन हत्या” भी कहा जाता है।
अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं
बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर उन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जिनके जिम्मे यह सब कुछ आता है। यदि पर्यटन विभाग के अधिकारी समय– समय पर क्रूज के चलने पर सुरक्षा जांच करते तो यह घटना टल सकती थी। लेकिन, इन अधिकारियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। केवल क्रूज पायलट और क्रू मेंबर्स के सर पर इस घटना का ठीकरा फोड़ा जा रहा है।
यह मामला है
दरअसल 30 अप्रैल को जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम में एक क्रूज डूब गया था। इस क्रूज में 40 से 45 लोग सवार थे। इनमें से केवल 29 यात्रियों की टिकट काटी गई थी। किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी, इससे लोगों। के बचने का चांस और कम हो गया। इस दौरान क्रूज के डूबने से 12 लोगों की मौत हो गई थी। 28 लोगों का रेस्क्यू कर उन्हें बचा लिया गया था।










