लेंस डेस्क। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में अग्रिम जमानत दे दी। यह मामला नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों से जुड़ा है।
पिछले महीने एक विशेष पॉक्सो अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया था कि आरोपों की जांच के लिए स्वामी के खिलाफ केस दर्ज किया जाए। शिकायत में कहा गया था कि एक शिविर के दौरान दो नाबालिग लड़कों के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया।
यह शिकायत आशुतोष महाराज की ओर से की गई थी, जो कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े पक्षकार भी हैं। इसके बाद प्रयागराज पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, जिसके खिलाफ आरोपी ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की।
barandbench.com की खबर के अनुसार, सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि पीड़ितों का घटना की जानकारी अपने अभिभावकों को न देकर किसी बाहरी व्यक्ति को बताना सामान्य व्यवहार के अनुरूप नहीं लगता। साथ ही केस दर्ज कराने में हुई देरी पर भी कोर्ट ने आपत्ति जताई।
अदालत ने यह भी नोट किया कि पीड़ितों ने 18 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता को घटना की जानकारी दी थी, लेकिन पुलिस को सूचना देने में छह दिन की देरी हुई। इसके पीछे “पूजा/यज्ञ में व्यस्तता” का कारण बताया गया, जिसे कोर्ट ने संदेह के दायरे में माना।
कोर्ट ने यह भी गंभीर टिप्पणी की कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़ितों के इंटरव्यू कई हिंदी न्यूज चैनलों पर प्रसारित हुए, जो पॉक्सो और जुवेनाइल जस्टिस कानून की प्रक्रिया के खिलाफ है। अदालत ने इसे बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय बताया।
मेडिकल रिपोर्ट पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए। रिपोर्ट में पीड़ितों के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई और डॉक्टर ने यह कहा कि यौन शोषण से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष भी नहीं दिया गया है। साथ ही आरोपी का मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया गया, जो ऐसे मामलों में जरूरी होता है।
अदालत ने यह भी कहा कि शिकायत से पहले प्रशासन और आरोपी के बीच मकर संक्रांति के दौरान संगम में स्नान को लेकर विवाद हुआ था, इसलिए पूरे मामले की सावधानीपूर्वक जांच जरूरी है।
इससे पहले 27 फरवरी को कोर्ट ने आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी। अब अदालत ने निर्देश दिया है कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार समेत अन्य वकीलों ने आरोपी की ओर से पैरवी की, जबकि राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोयल और अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता रीना एन सिंह पेश हुईं।









