नई दिल्ली। अर्थ जगत में बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद देश की दो महिलाओं का करियर विवादों में घिर चुका है। इसमें पहला नाम है चंदा कोचर और अब दूसरा नाम इस सूची में पूर्व सेबी चीफ माधबी बुच का जुड़ गया। कोचर को ‘लोन के बदले कैश’ मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।
वहीं, मुंबई की विशेष अदालत ने बुच को शेयर बाजार में धोखाधड़ी के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। बुच पर कार्रवाई का आदेश अदालत ने उनके सेबी से कार्यमुक्त होने के दो दिन बाद ही दिए हैं।
चंदा कोचर : लोन के बदले कैश
एक दौर में देश के सबसे प्रभावशाली बैंकरों में शुमार रहीं चंदा कोचर, जिन्होंने आईसीआईसीआई बैंक को निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। ‘लोन के बदले कैश’ घोटाले में कथित अनियमितताओं के आरोपों के चलते सीबीआई ने उन्हें और उनके पति दीपक कोचर को गिरफ्तार कर लिया था।
फोर्ब्स की प्रतिष्ठित सूची में जगह बना चुकीं चंदा कोचर कभी दुनिया के बड़े कॉरपोरेट चेहरों में गिनी जाती थीं। उन पर आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन ग्रुप की कंपनियों को दिए गए लोन में गड़बड़ी के आरोप लगे, जिसके चलते 23 दिसंबर 2022 को सीबीआई ने कार्रवाई की थी।
आईसीआईसीआई बैंक ने मई 2018 में वीडियोकॉन ग्रुप को 3,250 करोड़ रुपये के लोन देने में कोचर की कथित भूमिका के बारे में शिकायत मिलने के बाद उनके खिलाफ जांच शुरू की थी। आरोप लगे कि कर्ज देने से कोचर के पति दीपक कोचर को फायदा हुआ। जब विवाद बढ़ा तो कोचर छुट्टी पर चली गई थीं और अर्ली रिटायरमेंट के लिए आवेदन किया था, हालांकि बाद में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था।
माधबी बुच : शेयर बाजार में धोखाधड़ी के आरोप
28 फरवरी 2025 को माधबी बुच ने सेबी के अध्यक्ष पद का कार्यकाल पूरा किया। इसके दो दिन बाद ही, यानी 2 मार्च को मुंबई की विशेष भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने शेयर बाजार में धोखाधड़ी और नियमों के उल्लंघन के मामले में बुच पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। यह आदेश ठाणे के पत्रकार सपन श्रीवास्तव की याचिका पर दिया गया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सेबी अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन करने में असफल रहे। उन्होंने बाजार में हेरफेर को बढ़ावा दिया और ऐसी कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने की अनुमति दी, जो तय मानकों को पूरा नहीं करती थी। इससे कॉर्पोरेट धोखाधड़ी का रास्ता खुला।
सेबी में अध्यक्ष रहते हुए भी माधबी बुच का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। अडानी से संबंधों को लेकर विपक्षी दल संसद से लेकर सड़क तक सवाल उठा चुके हैं। हिंडनबर्ग रिसर्च ने दावा किया था कि बुच और उनके पति धवल बुच का निवेश बरमूडा और मॉरीशस स्थित उन फंड्स में था, जिनका कथित संबंध गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी से बताया गया। जब माधबी बुच सेबी की अध्यक्ष बनीं तो उन्होंने इनका खुलासा नहीं किया









