बसवराजु के मारे जाने के बाद सीएम साय ने कहा – नक्सलियों से बातचीत करने का कोई औचित्य नहीं, बात करना है तो नि:शर्त आएं

May 23, 2025 4:07 PM
Basavaraju

रायपुर। एंटी नक्सल ऑपरेशन में माओवादियों के सबसे बड़े नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजु को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में मुठभेड़ में मार दिया गया है। इसे अब तक किसी भी नक्सल ऑपरेशन में फोर्स की सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। बसवराजु के तौर पर फोर्स को मिली सफलता के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अंबिकापुर दौर से लौटते ही सीएम साय सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस लेने पहुंचे। इस दौरान डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा और डीजीपी अरुण देव गौतम भी मौजूद थे।

पत्रकारों से चर्चा में सीएम साय ने कहा कि नक्सलियों से बात करने का कोई औचित्य नहीं है। thelens.in के सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि हम जब से सरकार में आए हैं, नक्सलियों से आह्वान कर रहें हैं कि उनके लिए राश्ता खुला है। नि:शर्त आकर बातचीत करने की बात हम लोग शुरू से कह रहें हैं। माओवादी हथियार छोड़े और आकर बात करें तो हम वार्ता करने को तैयार है, लेकिन अगर वे शर्त रखकर बात करना चाहते हैं तो कोई बातचीत नहीं होगी।

सीएम ने कहा कि बस्तर के लोग नक्सलियों से जूझ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह माओवाद को खत्म करना चाहते हैं। इसके लिए फोर्स कोशिश कर रही है। इसी कोशिश में कल फोर्स को बड़ी सफलता बसवराजु के रूप में मिली है। 3 दशक में यह पहली बार हुआ है कि मुठभेड़ में महासचिव स्तर का माओवादी मारा गया है। बस्तर में पिछले डेढ़ सालों में शांति है, जो एंटी नक्सल ऑपरेशन की वजह से कामयाब हो पाई है। हम बस्तर को विकास की मुख्यधारा में लाना चाहते हैं और चाहते हैं कि बस्तर में बिना डर के लोग घूम सकें।

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सीएम ने कहा कि बसवराजु माओवादियों का हेड था। उसके मरने से नक्सलवाद पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब किसी सेना का सेनापति धराशाई होता है तो सेना का क्या हाल होता है, यह हम जानते हैं। माओवाद के साथ भी ऐसा ही होगा।

सीएम ने अपनी बात की शुरुआत में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नक्सलवाद बहुत बड़ा खतरा है। हमारा ये छत्तीसगढ़ समृध्य सांस्कृतिक विरासत के लिए, घने वन क्षेत्र और विभिन्न जनजातीय समुदायों के लिए जाना जाता है। लंबे समय से नक्सल चुनौतियों से जूझ रहा है। नक्सलवाद ने बस्तर क्षेत्र के निवासियों और जनजातीय समाज के लोगों को भय, हिंसा और असुरक्षा के माहौल में जीने के लिए विवश किया है। उन्हें स्वास्थ्य, शिक्षा सहित जरूरी सुविधाओं के बगैर जीने के लिए मजबूर कर दिया है।

हैदराबाद में बैठे उनके नक्सल समर्थकों से बात नहीं होगी : गृहमंत्री

इस दौरान वामपंथी संगठनों और तेलंगाना में शांति समिति की तरफ से उठी मांग को लेकर प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, ‘हैदराबाद में बैठकर वह लोग एक शांति समिति बना लेंगे और सरकार को बताएंगे कि क्या करना है और क्या नहीं करना है, यह नहीं चलेगा। हैदराबाद में बैठे नक्सल समर्थकों से बात नहीं होगी। वे तब कहां थे जब बस्तर के आदिवासी मर रहे थे। हमारी फोर्स के जवान मारे जा रहे थे। हम सिर्फ नक्सलियों से बात करेंगे। वे हथियार छोड़ें और सामने आकर बात करें, हम बात करेंगे।’ प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में गृहमंत्री ने कहा, ‘नक्सली लगातार समर्पण कर रहें हैं। इस साल समर्पण की संख्या ज्यादा है और गिरफ्तार होने वालों की संख्या कम है। हमारे अभियान का असर पड़ा है। हमारी पुर्नवास नीति का फायदा मिल रहा है। हमारी पुर्नवास नीति देशभर में सबसे बेस्ट है, इसलिए नक्सली सरेंडर कर रहें हैं।’

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। 2022 से दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर के तौर पर काम किया है। इस दौरान स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन खबरें लिखीं। दैनिक भास्‍कर से पहले नवभारत, नईदुनिया, पत्रिका अखबार में 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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