महादेव सट्टा ऐप का सरगना सौरभ चंद्राकर भारत लाया गया, अब खुलेंगे किसके संरक्षण में चलता था करोड़ों का कारोबार?

रायपुर। महादेव (Mahadev) ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले का मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर आखिरकार भारत लाया गया है। सीबीआई की विशेष टीम रविवार, 1 नवंबर को उसे ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लेकर पहुंची। सोमवार को उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा। हजारों करोड़ रुपये के इस कथित सट्टा कारोबार की जांच लंबे समय से चल रही है। अब चंद्राकर की वापसी के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध सट्टेबाजी का नेटवर्क आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था और इसमें किन प्रभावशाली लोगों की भूमिका थी?

भिलाई से दुबई तक कैसे फैला सट्टे का कारोबार?

भिलाई में कभी जूस की दुकान चलाने वाला सौरभ चंद्राकर कुछ ही वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के कथित सट्टेबाजी नेटवर्क का प्रमुख चेहरा बन गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, चंद्राकर और रवि उप्पल ने मिलकर महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के जरिए देशभर में सट्टेबाजी का जाल फैलाया। दुबई से संचालित इस नेटवर्क में अलग-अलग शहरों के एजेंट और पैनल शामिल थे। क्रिकेट, फुटबॉल और दूसरे खेलों पर सट्टा खिलाया जाता था। आरोप है कि इससे होने वाली कमाई को फर्जी बैंक खातों और हवाला के जरिए ठिकाने लगाया जाता था।

इतने बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?

महादेव ऐप का कारोबार कई वर्षों तक चलता रहा। इस दौरान करोड़ों रुपये के लेनदेन और देशभर में फैले एजेंटों के नेटवर्क की बात सामने आई। जांच एजेंसियों ने कुछ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर पैसे देकर कारोबार चलाने के आरोपों की भी जांच की है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े नेटवर्क की जानकारी जिम्मेदार एजेंसियों को कब मिली और समय रहते इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए? यदि सरकारी संरक्षण के आरोप सही हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?

छह हजार करोड़ के मामले में अब तक क्या हुआ?

ईडी के मुताबिक, महादेव ऐप से जुड़े कथित अवैध लेनदेन का आंकड़ा करीब छह हजार करोड़ रुपये बताया गया है। मामले में भारत और विदेश की कई संपत्तियां कुर्क की गई हैं। सीबीआई ने भी दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया है। हालांकि, इतने बड़े वित्तीय नेटवर्क में पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा और इसके वास्तविक लाभार्थी कौन थे, यह जांच का अहम सवाल बना हुआ है।

चंद्राकर की वापसी से क्या सामने आएगा?

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन केवल मुख्य आरोपी को पकड़ लेना इस मामले का अंत नहीं है। असली चुनौती उन लोगों की भूमिका सामने लाने की है, जिन्होंने कथित तौर पर इस कारोबार को चलाने, पैसे के लेनदेन और कार्रवाई से बचाने में मदद की।

अब देखना होगा कि सीबीआई की पूछताछ से महादेव ऐप के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों के बारे में कितनी जानकारी सामने आती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहती है या अवैध कमाई और कथित संरक्षण की पूरी व्यवस्था तक पहुंचती है।

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