कानफोड़ू डीजे के खिलाफ मेडिकल जगत एकजुट, विधेयक पर आपत्तियाँ दर्ज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित कोलाहल नियंत्रण अधिनियम विधेयक, 2026 के प्रारूप पर रायपुर के मेडिकल समुदाय ने जोरदार आपत्तियाँ और सुझाव भेजे हैं। प्रमुख चिकित्सकों, एम्स और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों, पीजी रेजिडेंट्स, मेडिकल छात्रों, नर्सिंग स्टाफ तथा आयुर्वेदिक कॉलेज के स्कॉलर्स ने वाहनों पर डीजे के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

राज्य शासन ने 29 सितंबर को सार्वजनिक सूचना जारी कर विधेयक पर 30 दिनों के अंदर आपत्तियाँ और सुझाव मांगे थे। अंतिम तिथि से पहले रायपुर के स्वास्थ्य क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव और पुलिस को पत्र भेजकर अपनी बात रखी।

डॉक्टरों और छात्रों ने मिलकर आवाज उठाई

ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ लंबे समय से काम कर रहे ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि यह पहली बार है जब किसी शहर के मेडिकल जगत ने सामूहिक रूप से इस मुद्दे पर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। उनके साथ कई प्रतिष्ठित डॉक्टर शामिल हैं। इनमें नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीती गुप्ता, ईएनटी सर्जन डॉ. अनिल जैन, डॉ. निंदर सिंह चावला, ऑर्थोपेडिक डॉ. सौरभ चोपड़ा, फिजिशियन डॉ. विवेक अग्रवाल, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. पियूष दुबे सहित दर्जनों नाम हैं।

जिला अस्पताल के कई डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मचारी और मेडिकल इंटर्न भी इस मुहिम में शामिल हुए। एम्स रायपुर के करीब 92 डॉक्टर और पीजी रेजिडेंट्स तथा 2022 से 2025 बैच के 262 मेडिकल छात्रों ने हस्ताक्षर किए। शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के 74 एमडी-एमएस स्कॉलर्स और छात्रों ने भी अपनी आपत्तियाँ भेजीं। राजस्थान, बिहार, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के छात्र भी इसमें शामिल हैं।

रायपुर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन, इन-सर्विस डॉक्टर एसोसिएशन और छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन के पदाधिकारियों के नेतृत्व में कवर्धा, महासमुंद, राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर और अंबिकापुर जैसे जिलों के डॉक्टरों ने भी समर्थन दिया।

नागरिक समाज का भी समर्थन

डॉक्टरों के अलावा शहर के कई प्रबुद्ध नागरिकों ने भी आपत्तियाँ दर्ज कराईं। इनमें उमा शंकर ओझा, हरजीत जुनेजा, पवन चंद्राकर, राजीव लूथरा और अन्य नाम शामिल हैं।

प्रमुख आपत्तियाँ और सुझाव

मेडिकल समुदाय ने विधेयक में कुछ ठोस बदलाव की मांग की है:

वाहनों पर डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध

डीजे और अन्य तेज आवाज वाले यंत्रों से सुनने की क्षमता को स्थायी नुकसान हो सकता है। अत्यधिक शोर से तनाव, ब्लड प्रेशर बढ़ना और हृदय रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। त्योहारों के दौरान कई मरीज अस्पताल पहुँचते हैं, लेकिन देर होने पर सुनने की क्षमता वापस नहीं आ पाती। इसलिए वाहनों पर डीजे के इस्तेमाल पर पूरी पाबंदी और उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए।

खतरनाक रोशनी वाली लाइटों पर नियंत्रण

डीजे के साथ इस्तेमाल होने वाली तेज मूविंग हेड बीम लाइटें आँखों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं। कुछ मामलों में दृष्टि स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। केवल रोशनी की तीव्रता नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए डीजे पर प्रतिबंध जरूरी है।

अस्पतालों के आसपास मौन क्षेत्र

सरकारी और निजी अस्पताल, नर्सिंग होम तथा क्लिनिक को मौन क्षेत्र घोषित किया जाए। इनके चारों ओर 300 मीटर की दूरी तक ध्वनि प्रदूषण रोकने के सख्त नियम लागू किए जाएँ। नवजात शिशु, बच्चे, बुजुर्ग और गंभीर मरीजों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शिकायतों का तुरंत निपटारा और उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था हो।

विवाद और हिंसा रोकने के उपाय

हर साल डीजे बजाने और बंद कराने को लेकर झगड़े, मारपीट और यहाँ तक कि हत्या की घटनाएँ सामने आती हैं। दुर्ग जिले में एक घटना में तेज आवाज बंद न होने से परेशान व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली थी। केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से प्रभावी नियंत्रण की व्यवस्था बनाई जाए।

डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरण समस्या है। इसके खिलाफ प्रदेशभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भी इस मुद्दे पर आवाज उठाएँ।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related Stories