गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वन परिक्षेत्र में 52 हाथियों(Elephants) के दल की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत है। पिछले एक सप्ताह से इलाके में घूम रहा हाथियों का दल अब तीन से चार अलग-अलग समूहों में बंट गया है। हाथियों की लगातार आवाजाही से जंगल से लगे गांवों के लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। कई परिवारों ने घरों की छतों पर तंबू लगा लिए हैं, जहां वे रात गुजार रहे हैं। ग्रामीणों को अपनी जान के साथ खेतों में खड़ी फसलों की भी चिंता सता रही है।
हाथियों के डर से रातभर जाग रहे ग्रामीण, खेतों में जाने से भी डर
मरवाही वन परिक्षेत्र के जंगलों में हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिन में खेतों और रात में घरों की सुरक्षा को लेकर लोग परेशान हैं। हाथियों के अलग-अलग समूहों में बंटने से आसपास के कई गांवों में खतरा बना हुआ है।
स्थानीय ग्रामीण छक्के लाल मार्को गले ने बताया कि इलाके में करीब 52 से 53 हाथी पिछले एक सप्ताह से डेरा डाले हुए हैं। हाथियों के डर से ग्रामीणों को रातभर जागना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब हाथियों का झुंड खेतों में घुसता है तो फसलें बर्बाद हो जाती हैं। ऐसे में किसानों के सामने अपनी उपज बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
जंगल से लगे चार स्कूलों में छुट्टी की मांग
हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। जंगल से सटे कुछ स्कूलों के आसपास हाथियों की गतिविधियां देखी गई हैं। शिक्षक लखन लाल सुमेर के मुताबिक, स्कूल से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर हाथी मौजूद हैं, जिससे लोगों में डर बना हुआ है।
मरवाही वन परिक्षेत्र अधिकारी मुकेश साहू ने बताया कि जंगल से लगे स्कूलों की सूची तैयार की गई है। आसपास के चार स्कूलों में एहतियातन छुट्टी देने के लिए उच्चाधिकारियों से आग्रह किया गया है। वन विभाग ने संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर बच्चों की सुरक्षा के लिए समय पर छुट्टी कराने की व्यवस्था करने को कहा है। हालांकि, स्कूलों में छुट्टी घोषित होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हथिनी के बच्चे को जन्म देने की चर्चा, वन विभाग ने नहीं की पुष्टि
बहरीझोरखी के जंगल में मौजूद हाथियों के दल को लेकर एक और जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि दल में शामिल एक हथिनी ने बच्चे को जन्म दिया है। हालांकि, वन विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी मुकेश साहू के मुताबिक, दल में तीन से चार मादा हाथियों के गर्भवती होने की जानकारी मिली है। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। विभाग का कहना है कि अलग-अलग समूहों में बंटे हाथी कई गांवों के आसपास घूम रहे हैं, इसलिए निगरानी बढ़ाई गई है।
दानीकुंडी में निगरानी केंद्र, गांवों में मुनादी कर लोगों को किया जा रहा सतर्क
वन विभाग ने हाथी-मानव संघर्ष रोकने के लिए दानीकुंडी में हाथी निगरानी केंद्र स्थापित किया है। हाथी मित्र दल और वन कर्मचारियों की रोस्टर के अनुसार ड्यूटी लगाई गई है। आसपास के गांवों में मुनादी कर लोगों को हाथियों की मौजूदगी की जानकारी दी जा रही है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी मुकेश साहू ने बताया कि किसी गांव में हाथियों के घुसने की स्थिति में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। विभाग की प्राथमिकता जनहानि रोकने के साथ मकानों और फसलों को नुकसान से बचाना है।
निगरानी के दावों के बीच ग्रामीणों की सुरक्षा बड़ी चुनौती
वन विभाग लगातार निगरानी और सुरक्षा के इंतजाम करने की बात कह रहा है, लेकिन गांवों में हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए रातभर जागना पड़ रहा है। हाथियों की आवाजाही के बीच किसानों के सामने फसल बचाने और परिवारों के सामने सुरक्षित रहने की चुनौती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि निगरानी केंद्र और हाथी मित्र दल की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीणों को छतों पर तंबू लगाकर रात क्यों गुजारनी पड़ रही है? क्या प्रभावित गांवों में सुरक्षित ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था है? फिलहाल विभाग के सामने हाथियों और ग्रामीणों के बीच टकराव रोकने के साथ स्कूल जाने वाले बच्चों और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है।







