अयोध्या के बाद काशी मथुरा प्रयाग में भी भाजपा क्यों हारी

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में अयोध्या (Ayodhya)खोने के बाद भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश विधान परिष चुनावों में भाजपा का काशी, मथुरा, प्रयागराज से वर्चस्व खत्म हो गया है इन सीटों पर भी बीजेपी पराजित हुई है। दिलचस्प यह है कि ये हार तब हुई है जब योगी आदित्यनाथ समेत समूचा मंत्रिमंडल इन चुनावों में अपनी ताकत झोंक दिया था और तो और पीएम मोदी ने मतदान से कुछ घंटे पहले ही बनारस में रोड शो किया और 10 लाख की भीड़ के बीच एयर शो हिस्सा में लिया था।

बनारस और प्रयाग भी गोल

वाराणसी शिक्षक सीट पर समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की और भाजपा के डॉ. प्रमोद मिश्रा हार गए।​प्रयागराज यानि इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के डॉ. मानसिंह यादव जीते और भाजपा के अशोक कुमार राठौर को हार का सामना करना पड़ा।

मथुरा में आधी जीत आधी हार

​मथुरा जो आगरा खंड के अंतर्गत आता है में शिक्षक सीट पर सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल विजयी रहे और भाजपा के हरी किशोर तिवारी हारे, जबकि स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने सपा के शशांक यादव को हराकर जीत हासिल की।
 
जनाक्रोश बना बड़ी वजह

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भाजपा की बड़ी पराजय के पीछे युवाओं, पढ़े लिखे लोगों का आक्रोश, वादाखिलाफी, वोट चोरी चंदा चोरी जिम्मेदार है। दूसरी तरफ विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुए इस चुनाव में यह संकेत भी साफ मिल रहे हैं कि न केवल राज्यसरकार बल्कि केंद्र सरकार के काम काज से जनता खुश नहीं है। यकीनन केंद्र से नाराजगी की सर्वाधिक छाप हिंदी भाषी राज्यों में सबसे पहले दिखाई देती रही है।

विपक्ष के वोटर हुए एकजुट

विपक्ष के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के एकजुट होने से बीजेपी के परंपरागत वोट बैंक में बिखराव हुआ। यह बिखराव आमतौर पर मोदी के चेहरे के पीछे काम नहीं करता था लेकिन इन चुनावों में यह काम कर गया। कई सीटों पर भाजपा को प्रत्याशी चुनने में भारी दिक्कत आई जिससे पुराने चेहरों पर दांव लगाना भारी पड़ा। भाजपा के पास जिताऊ कैडर की कमी थी जो कि बिना मोदी या योगी के चेहरे के जीत जाएं। साफ संकेत मिल रहे थे कि प्रत्याशी का व्यक्तिगत व्यवहार और आम शोहरत जीत की वजह बने हैं।

युवाओं का गुस्सा भाजपा की हार

उत्तर प्रदेश के युवाओं और परीक्षार्थियों के बीच पेपर लीक तथा ठेके/संविदा पर भर्तियों को लेकर गहरा गुस्सा है। बार बार पर लीक से युवा तंग आ चुके हैं भर्तियों का टोटा है। वोट चोरी से जो पूरे देश में आक्रोश फैला है वो आक्रोश यूपी में पुलिस के दम पर दबाने की कोशिश हो रही है। लेकिन वो दबाव इन चुनावों में बैकफायर कर गया। जो सड़क पर नहीं उतर पाए वो भाजपा के खिलाफ वोट कर दिए।कार्यकर्ताओं की अनदेखी, प्रशासनिक हावीपन और अति-आत्मविश्वास के कारण पार्टी का जमीनी कैडर पूरी क्षमता से सक्रिय नहीं हो पाया। जिसका असर हार के रूप में सामने आया।

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