रियाद/तेहरान। सऊदी अरब और यमन के हूती (Houthi) विद्रोहियों के बीच एक बड़े समझौते की खबर सामने आई है। इजराइली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब ने अपने तेल ठिकानों, हवाई अड्डों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के बदले हूती विद्रोहियों को एक अरब अमेरिकी डॉलर देने की कथित पेशकश की है। दावा है कि ईरान की मध्यस्थता में तेहरान में इस प्रस्ताव पर बातचीत हुई। हालांकि, किसी भी पक्ष ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
पुनर्निर्माण के नाम पर आर्थिक मदद की चर्चा
रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान के कथित तेहरान दौरे के दौरान इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके तहत हूती नियंत्रित इलाकों में पुनर्निर्माण और आर्थिक सहायता के लिए रकम उपलब्ध कराई जा सकती है। बदले में सऊदी अरब अपने महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमले बंद करने और संघर्षविराम बनाए रखने की गारंटी चाहता है।
तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों से बढ़ी थी चिंता
यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष के दौरान हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों पर कई बार ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इन घटनाओं ने देश की सुरक्षा के साथ तेल उत्पादन और निर्यात को लेकर भी चिंताएं बढ़ाई हैं। ऐसे में सऊदी नेतृत्व सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं तलाश रहा है।
विजन 2030 के लिए क्षेत्रीय स्थिरता जरूरी
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अपनी ‘विजन 2030’ योजना के तहत देश को पर्यटन, व्यापार और निवेश का बड़ा केंद्र बनाना चाहते हैं। इसके लिए विदेशी निवेश आकर्षित करने के साथ क्षेत्र में शांति बनाए रखना भी जरूरी है। हूती विद्रोहियों के साथ स्थायी समझौता इस योजना को आगे बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
ईरान की भूमिका से बदल सकते हैं क्षेत्रीय समीकरण
अगर यह समझौता होता है, तो मध्य पूर्व में ईरान की कूटनीतिक भूमिका मजबूत हो सकती है। वहीं, हूती विद्रोहियों के लिए इसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा सकता है। इस संभावित समझौते का असर अमेरिका और इजराइल की क्षेत्रीय रणनीति पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल एक अरब डॉलर के प्रस्ताव, उसकी शर्तों और किसी संभावित भुगतान को लेकर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।










