नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन(Pinarayi Vijayan), उनकी बेटी वीणा टी और दामाद पी. ए. मोहम्मद रियास से जुड़े कथित CMRL-एक्सालॉजिक भुगतान मामले में दर्ज एफआईआर की जांच पर सात दिनों के लिए रोक लगा दी है। अदालत ने तीनों को केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील करने की अनुमति भी दी है।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें विजयन और अन्य याचिकाकर्ताओं को एकल पीठ के एफआईआर दर्ज करने के निर्देश के खिलाफ अपील करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अपील करने का अधिकार है, क्योंकि हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अपने आदेश में माना था कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दी गई जानकारी में संज्ञेय अपराध के संकेत मौजूद हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच पर सात दिनों की रोक केवल इसलिए लगाई गई है, ताकि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अपील दायर कर सकें। यह आदेश मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय और हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले पक्ष की इस दलील से असहमति जताई कि एफआईआर दर्ज करने के निर्देश के खिलाफ अपील करने के लिए याचिकाकर्ता प्रभावित पक्ष नहीं हैं।
अदालत के अनुसार, यह ऐसा मामला नहीं था जिसमें राज्य सरकार ने केवल ईडी से मिली जानकारी के आधार पर अपने स्तर पर एफआईआर दर्ज की हो। यहां एफआईआर दर्ज करने और जांच शुरू करने की प्रक्रिया हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायिक आदेश के बाद शुरू हुई थी।
एकल पीठ ने माना था कि ईडी की ओर से भेजी गई जानकारी संज्ञेय अपराध का खुलासा करती है और इसलिए पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि संबंधित लोगों को इस निष्कर्ष को अपील में चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जाती, तो यह निष्कर्ष उनके खिलाफ एफआईआर को चुनौती देने वाली किसी स्वतंत्र कानूनी कार्यवाही में भी उनके सामने बाधा बन सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(4) में एफआईआर दर्ज करने के न्यायिक निर्देश से पहले संभावित आरोपी को प्रभावित करने वाली प्रक्रिया के संबंध में नई व्यवस्था शामिल है। हालांकि, पीठ ने साफ किया कि इस प्रावधान का उल्लेख मामले के गुण-दोष पर फैसला देने के लिए नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू करने और उसे अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए संबंधित विशेष कानून की अन्य शर्तों का पालन आवश्यक है।








