नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के विधानसभा (Assembly)क्षेत्रों के विश्लेषण से पता चला है कि फरवरी 2025 के चुनाव से ठीक पहले दो महीनों में जोड़े गए मतदाताओं के नाम इस साल के एसआईआर ड्राफ्ट में अनुपात से ज्यादा हटाए गए हैं। न्यूज वेबसाइट न्यूज लांड्री के अनुसार जनवरी 2025 में जोड़े गए 1,430 वोटरों में से 560 यानी करीब 40 प्रतिशत नाम हट गए। दिसंबर 2024 में जोड़े गए 2,369 में से 783 यानी करीब एक-तिहाई गायब हैं।
न्यूज लांड्री अपनी एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में कहता है कि जिस सीट से आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल भाजपा के प्रवेश वर्मा से करीब 4,000 वोटों के अंतर से हारे थे। चुनाव के समय यहां 1,08,788 मतदाता थे। एसआईआर में इनमें से 37,315 नाम हटे, यानी लगभग 34.3 प्रतिशत कटौती। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच, एसआईआर शुरू होने से पहले ही 5,713 नाम जुड़े और 25,185 हटे। एसआईआर की कटौती जोड़ दें तो 2025 चुनाव के बाद इस सीट से कुल 62,500 मतदाता हट चुके हैं।
पूरे दिल्ली में 2025 चुनाव और एसआईआर के बीच 11.1 लाख नाम हटे। एसआईआर में और 47.5 लाख हटे। फरवरी 2025 में 1.56 करोड़ वाले दिल्ली के मतदाता अगस्त 2026 तक 97.5 लाख रह गए। कई कटौतियां सही लगती हैं, कुछ लोग अंतिम सूची से पहले नाम वापस जुड़वाने की उम्मीद कर रहे हैं।
ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन के कैंपस में जनवरी 2025 में जोड़े गए 10 छात्रों के नाम अब “स्थायी रूप से स्थानांतरित” बताकर हटा दिए गए। ये रेजिडेंशियल छात्र थे। संस्था के अनुसार चुनाव से पहले जिला प्रशासन ने दृष्टिबाधित छात्रों के लिए विशेष कैंप लगाने को कहा था। चुनाव आयोग के मैनुअल में हॉस्टल छात्रों को सामान्य निवासी मानकर पंजीकरण की अनुमति है, बशर्ते कोर्स कम से कम एक साल का और मान्यता प्राप्त हो। ज्यादातर छात्र अब दिल्ली के बाहर पंजीकृत हैं और एन्यूमरेशन के समय उनका कोर्स पूरा हो चुका था।
63 वर्षीय गिरीश चंद्र पाल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ उसी इमारत में 20 साल से रह रहे हैं। उनका नाम दिसंबर 2024 में जुड़ा था। अब परिवार के सभी नाम “स्थायी रूप से स्थानांतरित” बताकर हटा दिए गए। पाल को रिपोर्ट के बाद ही पता चला। वे पूछते हैं, “अब मेरा नाम दोबारा कैसे जुड़ेगा?”
पिलांजी गांव, सरोजिनी नगर में जनवरी की कटौतियों में से अकेले 173 नाम हैं। एक पते पी-8 पर आठ लोगों के नाम जनवरी 2025 में जुड़े थे। सभी अब हटा दिए गए। मकान मालिक सुनील बसोया कहते हैं कि उनके पते पर असल निवासियों से कहीं ज्यादा नाम दर्ज हुए थे। करीब 11 वोटर कार्ड आयोग ने भेजे, कोई लेने नहीं आया। उन्होंने तब के एईआरओ से शिकायत की, लेकिन कुछ नहीं बदला। यह घनी आबादी वाला इलाका है। 2025 में इन पांच बूथों पर वर्मा ने केजरीवाल से बढ़त बनाई थी।
बीएलओ मदन सिंह कहते हैं कि ज्यादातर मजदूर दिन भर बाहर रहते हैं, घर पर नहीं मिलते। जो फॉर्म भरे, वे शामिल हुए। बाकी एएसडीडी सूची में डाले गए। ईआरओ पियूष मोहंती कहते हैं कि बीएलओ घर गए, लेकिन कई प्रवासी फॉर्म नहीं जमा कर पाए। दावा-आपत्ति अवधि में फॉर्म-6 भरकर नाम वापस जुड़वाया जा सकता है।
जम्शेद आलम का नाम दिसंबर 2024 में जुड़ा था। एसआईआर के समय नागरिकता संबंधी चिंता के चलते वे बिहार गए और वहां पंजीकरण कराया। दिल्ली की सूची से वे बाहर हैं। किडवई नगर ईस्ट में दिसंबर-जनवरी में जुड़े करीब 57 नाम हटे। कुछ लोगों को कटौती का पता भी नहीं था।
ईआरओ कार्यालय ने बाद में सफाई दी कि ड्राफ्ट में नाम न होना अंतिम फैसला नहीं है। पात्र व्यक्ति 30 सितंबर तक फॉर्म-6 भर सकते हैं। अंतिम सूची 4 नवंबर 2026 को आएगी। प्रत्येक मामला सत्यापन और नियमों के आधार पर देखा जाता है।









