रायपुर। दयानंद सागर प्रबंध संस्थान, बेंगलुरु की ओर से शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाने वाला राष्ट्रीय स्तर का ‘गुरु विशिष्ट’ सम्मान इस वर्ष छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के अपर संचालक डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता को प्रदान किया गया है। उन्हें यह सम्मान शोधपत्र लेखन और शोध निर्देशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए दिया गया। डॉ. गुप्ता मूल रूप से वाणिज्य विषय के प्राध्यापक हैं और वर्तमान में उच्च शिक्षा विभाग में प्राचार्य सह अपर संचालक के पद पर कार्यरत हैं। वे पूर्व में छत्तीसगढ़ शासन में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। रायपुर से एम.कॉम. की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सूरत स्थित साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
डॉ. गुप्ता के नाम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित शोध कार्यों का लंबा अनुभव है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके 106 अंतरराष्ट्रीय और 388 राष्ट्रीय शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। शोध निर्देशक के रूप में उन्होंने 16 शोधार्थियों को पीएचडी के लिए मार्गदर्शन दिया है, जबकि 76 शोध प्रबंधों का मूल्यांकन भी किया है। अलग-अलग संस्थानों में वे अब तक 488 व्याख्यान दे चुके हैं। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे लगातार अकादमिक लेखन और शोध कार्य से जुड़े रहे हैं। उनका शोधग्रंथ ‘Development of Tourism Industry and Marketing in India’ जर्मनी की लैम्बर्ट एकेडमिक पब्लिशिंग द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित किया गया है। गुणवत्तापूर्ण शोध और अध्यापन के लिए उन्हें अमेरिका, सिंगापुर और भूटान में भी सम्मान मिल चुके हैं।
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पूर्व में बेस्ट डॉक्टोरल थीसिस अवार्ड, वैल्यू विजन अवार्ड और ओवरऑल आउटस्टैंडिंग रिसर्च वर्क अवार्ड सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। डॉ. गुप्ता की रुचि फिलाटेली यानी डाक टिकट और मुद्रा संग्रहण में भी है। इस क्षेत्र में उनके नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, यूनिवर्सल वर्ल्ड रिकॉर्ड फोरम और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में रिकॉर्ड दर्ज होने की जानकारी दी गई है। वे दो दशक से अधिक समय तक राज्य के सेंट्रल बोर्ड ऑफ स्टडीज के संयोजक और अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। सरकारी सेवा के दौरान नियमों और प्रक्रियाओं के पालन पर जोर देने के साथ वे अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम तथा राज्य सिविल सेवा नियमों के संबंध में मार्गदर्शन भी देते रहे हैं।











