रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में तमनार (Tamnar) के लिबरा CHP चौक पर कोयला खनन परियोजना के विरोध में दिसंबर 2025 में हुए घटनाक्रम और ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर अब न्यायिक जांच की मांग उठी है।
हाल ही में रायगढ़ दौरे पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लोगों से कहा था कि पुलिस की कार्रवाई के तहत बनाए गए आरोपियों के मामले में न्यायिक जांच की मांग की जानी चाहिए। इसके बाद ग्रामीणों, अधिवक्ताओं और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने राज्यपाल रमेन डेका के नाम ज्ञापन तैयार कर रायगढ़ कलेक्टर को सौंपा है।


ज्ञापन के जरिए तमनार पुलिस द्वारा दर्ज किए गए आपराधिक मामलों की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने और ग्रामीणों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।
न्यायिक जांच की मांग करने वालों के मुताबिक, तमनार ब्लॉक कोयला अधिसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। दिसंबर 2025 में कोयला खनन परियोजना से जुड़ी जनसुनवाई आयोजित की गई थी। इसमें आसपास के ग्रामीणों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद प्रभावित गांवों के लोगों ने लिबरा के CHP चौक पर धरना प्रदर्शन शुरू किया।
तमनार ब्लॉक के निवासियों ने आरोप लगाया कि 14 प्रभावित गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर 2025 से CHP चौक पर धरने पर बैठे थे। उनकी मांग प्रस्तावित कोयला परियोजना से जुड़ी जनसुनवाई को निरस्त करने की थी। इसी दौरान धरना स्थल के आसपास अचानक वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी गई। इसी दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति वाहन की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई।
स्थानीय लोगों ने ज्ञापन में कहा गया है कि घटना के बाद ग्रामीणों ने पुलिस का विरोध किया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और कई ग्रामीणों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए।
इस कार्रवाई को ग्रामीणों के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कार्रवाई बताते हुए निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की गई है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में भय का माहौल बना है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई लोगों को गंभीर धाराओं में आपराधिक मामलों में फंसाया गया और उन्हें जेल भेजा गया।
राज्यपाल से मांग की गई है कि 27 दिसंबर 2025 की घटना के संबंध में तमनार थाने में ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक प्रकरणों की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने का आदेश दिया जाए।
घटना के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। प्रशासन ने इसके साथ ही संबंधित कोयला परियोजना की जनसुनवाई को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
वहीं, पुलिस के अनुसार 27 दिसंबर की घटना में प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव और सरकारी वाहनों में आगजनी की घटनाएं भी हुई थीं। इस मामले में पुलिसकर्मी घायल हुए थे और बाद में कई लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई की गई।
सितंबर 2026 में भी पुलिस ने इसी प्रकरण में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी जारी रखी है। पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक सितंबर के पहले सप्ताह में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।
अब ग्रामीण पक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई और दर्ज आपराधिक मामलों की न्यायिक जांच की मांग को राज्यपाल तक पहुंचाया गया है।
ज्ञापन पर अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीण प्रतिनिधियों समेत कई लोगों के हस्ताक्षर हैं।











