बंगाल में TMC की पहचान पर बड़ा संकट: ‘जोड़ा फूल’ फ्रीज, ममता गुट को फुटबॉलर तो बागियों को मिला लिफाफा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अंदरूनी विवाद अब चुनावी मैदान में साफ दिखाई देने लगा है। चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिह्न मिला है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न दिया गया है। आयोग ने यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए की है। दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में माना गया है।

दरअसल, विवाद की जड़ तृणमूल कांग्रेस के पुराने नाम और ‘फूल-घास’ यानी जोड़ा फूल चुनाव चिह्न पर दावे को लेकर है। आयोग ने 17 सितंबर को दोनों गुटों को आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में मूल नाम और चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों से वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न मांगे गए। शुक्रवार को आयोग ने अंतरिम आदेश के जरिए दोनों की नई चुनावी पहचान तय कर दी। यह फैसला ऐसे वक्त आया है, जब 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव होने हैं।

नंदीग्राम में बदला पूरा खेल

आयोग के फैसले के कुछ ही घंटों बाद नंदीग्राम की तस्वीर भी बदल गई। ममता गुट ने जिस संचिता प्रधान डे को नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया था, उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। नामांकन वापस लेने से पहले उनकी शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की खबर सामने आई। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया। यानी जिस सीट पर ममता गुट अपने उम्मीदवार के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा था, वहां अब वह सीधे चुनाव लड़ने के बजाय कांग्रेस के उम्मीदवार के समर्थन में खड़ा होगा।

ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लड़ाई जारी रखेगी और वह पीछे हटने वाली नहीं हैं। नंदीग्राम में कांग्रेस को समर्थन देने को उन्होंने भविष्य के गठबंधन की दिशा में एक संदेश बताया। ममता ने यह भी कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व और अन्य विपक्षी नेताओं से बात की है। हालांकि, इन बयानों और घटनाक्रम के बीच अलग-अलग दलों के बीच आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है।

विवाद कैसे यहां तक पहुंचा?

तृणमूल कांग्रेस में टूट के बाद दोनों गुट पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा कर रहे हैं। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट को विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के प्रमुख दल के रूप में मान्यता दी थी और ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। ममता गुट ने इस दावे का विरोध किया। इसी बीच कई विधायकों के पाला बदलने और पार्टी संगठन पर नियंत्रण को लेकर विवाद और गहरा गया।

अब चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले ने दोनों गुटों को फिलहाल अलग-अलग चुनावी पहचान दे दी है। एक तरफ ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ है, दूसरी तरफ ‘लिफाफा’—और बीच में तृणमूल कांग्रेस का पुराना ‘जोड़ा फूल’।

आगामी उपचुनाव इस पूरे विवाद का अगला बड़ा पड़ाव होंगे। खासकर नंदीग्राम में ममता गुट के प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने और कांग्रेस को समर्थन देने के फैसले ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। वहीं मूल पार्टी नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अंतिम स्थिति अभी आयोग की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now