नई दिल्ली। बहुचर्चित निठारी कांड में सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त हुए सुरेंद्र कोली (Surendra Koli)ने सुसाइड कर लिया है। सुरेंद्र रिहाई के बाद हरिद्वार में चाय-समोसे का खोखा चला रहे थे। उनके मददगार अब कानूनी कार्रवाई के लिए विधिक राय ले रहे हैं।
आरोप है कि वहां के एक प्रभावशाली खोखा स्वामी ने महज एक महीने में किराया 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया था। एडवांस भुगतान के लिए लगातार दबाव भी बनाया जा रहा था। इसी तनाव से तंग आकर सुरेंद्र कोली ने अपनी जान दे दी। खोखा स्वामी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप भी लगाया जा रहा है।
सुरेंद्र कोली अपनी परेशानी फोन पर बताते रहते थे। उन्हें हिम्मत रखने की सलाह भी दी गई थी। फिर भी उन्होंने यह कदम क्यों उठाया, उनके हितचिंतक हैरान हैं।रिहाई के बावजूद वे परिवार बिखरने और गांव में मां कुंती देवी से न मिल पाने का गम नहीं भुला पा रहे थे। गिरफ्तारी के बाद पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत जेल में उनसे मिलते रहे और हिम्मत बंधाते रहे। पिछले वर्ष उच्चतम न्यायालय ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया था।
मंगरूखाल के पूर्व प्रधान जोगा सिंह के अनुसार, सुरेंद्र कोली कहते थे कि बड़े लोगों ने उन्हें बलि का बकरा बना दिया और अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया। निठारी कांड का बड़ा दोषी उन्हीं को बना दिया गया।
नारायण सिंह रावत और जोगा सिंह जैसे लोगों ने रिहाई के बाद भी उनका साथ नहीं छोड़ा। उन्हें समझाया गया कि वे कुशल कारीगर हैं, इसलिए नौकरी की जगह छोटा काम शुरू करें। इसी सोच से उन्होंने गांव से दूर हरिद्वार में खोखा चलाया। लेकिन वहां भी किस्मत साथ नहीं दी।
नारायण सिंह रावत के अनुसार, सुरेंद्र कोली रोज फोन कर खोखे की हालत बताते थे। हालिया अमावस्या पर अच्छी कमाई के लिए आलू के समोसे बनाए थे, लेकिन बारिश से सब खराब हो गया। इसी बीच खोखा मालिक ने किराया दोगुना कर दिया और भुगतान का दबाव बढ़ा दिया, जिससे वे बहुत तनाव में आ गए थे।अब उनके मददगार खोखा मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।










