ओडिशा में मिले ऑरंगुटान बच्चों पर कानून क्या कहता है?

लेंस डेस्क। ओडिशा के बालासोर जिले में 8 सितंबर 2026 को पांच छोटे ऑरंगुटान बच्चे जंगल में मिले। ये बच्चे महज 6 से 8 महीने के हैं। ऑरंगुटान भारत में नहीं पाए जाते। ये सिर्फ इंडोनेशिया और मलेशिया के जंगलों में रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें अवैध तस्करी के जरिए भारत लाया गया। भारत अब सिर्फ ट्रांजिट रूट नहीं रह गया है, बल्कि यहां विदेशी पालतू जानवरों की मांग भी बढ़ रही है।

ऑरंगुटान क्यों इतने खास और संरक्षित?

ऑरंगुटान तीन प्रजातियों में बंटे हैं – बोर्नियन, सुमात्रन और तपनुली। ये सभी Critically Endangered हैं, यानी बहुत खतरे में। IUCN रेड लिस्ट में इनकी स्थिति खराब है। जंगलों की कटाई और शिकार इनके लिए सबसे बड़े खतरे हैं। छोटे बच्चों की मांग विदेशी पालतू बाजार में ज्यादा होती है। मां को मारकर या अलग करके बच्चों को पकड़ा जाता है।

CITES और भारतीय कानून क्या कहते हैं?

भारत CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) का सदस्य है। यह अंतरराष्ट्रीय समझौता वन्यजीवों के व्यापार को नियंत्रित करता है। ऑरंगुटान CITES के Appendix I में हैं। इसका मतलब है कि इनका वाणिज्यिक व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है। सिर्फ वैज्ञानिक या संरक्षण के मकसद से विशेष अनुमति से ही आ-जा सकते हैं।

भारत में Wildlife Protection Act, 1972 (2022 में संशोधित) लागू है। संशोधन के बाद CITES वाले जानवरों को Schedule IV में रखा गया है। अवैध आयात या व्यापार पर सख्त सजा है। अगर कोई जानवर बिना CITES परमिट के आया है, तो वह अवैध माना जाता है।

वापसी का नियम

कानून कहता है कि जब्त किए गए जीवित जानवरों को मूल देश वापस भेजा जाए। खर्च मूल देश वहन करता है। अगर वापस नहीं भेजा जा सकता तो उन्हें मान्यता प्राप्त चिड़ियाघर या रेस्क्यू सेंटर में रखा जाए। इंडोनेशिया के वन मंत्रालय ने भारत से संपर्क किया है। उन्होंने मदद की पेशकश की है। DNA टेस्ट से पुष्टि हो जाए कि ये इंडोनेशिया के हैं तो वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी। स्वास्थ्य जांच, क्वारंटीन, आनुवंशिक पहचान और परिवहन की तैयारी वे कर रहे हैं।

चुनौतियां क्या हैं?

DNA टेस्ट : प्रजाति और मूल स्थान पता करने में समय लगता है।
पिछले मामले : 2022 में असम में दो ऑरंगुटान मिले थे। वे अभी भी भारत में हैं, क्योंकि तस्करी नेटवर्क की जांच अधूरी रही।
ओडिशा सरकार : नंदनकानन चिड़ियाघर में रखना चाहती है। पर्यटन बढ़ाने का तर्क है लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इन्हें जंगल में वापस छोड़ना चाहिए।
भारत की मांग : यहां विदेशी पालतू जानवरों की बढ़ती चाहत तस्करी को बढ़ावा दे रही है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

वन्यजीव विशेषज्ञ जोस लुईस कहते हैं, ‘ये साफ तौर पर अवैध तस्करी के शिकार हैं।’ इंडोनेशिया के संरक्षणवादी पनुट हदीसिसवोयो का कहना है कि इन्हें वापस भेजना चाहिए। वहां इन्हें जंगल में छोड़कर नई आबादी बनाई जा सकती है। सुमात्रा में पहले ही 400 से ज्यादा ऑरंगुटान को सफलतापूर्वक जंगल में बसाया जा चुका है फिलहाल बच्चे नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में क्वारंटीन में हैं। स्वास्थ्य ठीक हो रहा है। जांच STF और Wildlife Crime Control Bureau कर रहे हैं। तस्करी नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश जारी है। म्यांमार या बांग्लादेश बॉर्डर से आने का शक है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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