रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर (Bastar) में नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद अब राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों को मिली सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के संकेत मिले हैं। उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि बदली हुई परिस्थितियों में यह देखना जरूरी है कि किस नेता को कितनी सुरक्षा की जरूरत है।
गृह मंत्री के बयान के बाद बस्तर के नेताओं की सुरक्षा में संभावित कटौती को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल सरकार की ओर से किसी नेता की सुरक्षा हटाने या कम करने का अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सुरक्षा समीक्षा के बाद ही यह तय होगा कि किसका सुरक्षा घेरा यथावत रहेगा और कहां इसमें बदलाव किया जा सकता है।
गृह मंत्री विजय शर्मा ने संकेत दिया है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा की परिस्थितियां बदलने के बाद नेताओं को दिए गए अतिरिक्त सुरक्षा घेरे की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि समीक्षा इस बात की होगी कि जिस स्थिति में सुरक्षा दी गई थी, क्या मौजूदा समय में भी उसी स्तर की सुरक्षा की आवश्यकता है।
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का फोकस थ्रेट परसेप्शन यानी वास्तविक खतरे के आकलन पर रहेगा। जिन नेताओं के लिए खतरा गंभीर पाया जाएगा, उनकी सुरक्षा जारी रखी जा सकती है, जबकि जिन मामलों में खतरा कम पाया जाएगा, वहां सुरक्षा में बदलाव संभव है।
बस्तर में 100 से ज्यादा जनप्रतिनिधि सुरक्षा घेरे में
रिपोर्टों के मुताबिक बस्तर संभाग में 100 से ज्यादा जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक लोगों की सुरक्षा में बड़ी संख्या में जवान तैनात हैं। इनमें करीब 40 ऐसे नेता बताए जा रहे हैं, जिन्हें भारी सुरक्षा घेरा मिला हुआ है। सरकार अब यह आकलन करना चाहती है कि इन जवानों को नेताओं की सुरक्षा में तैनात रखना कितना जरूरी है और जरूरत के मुताबिक उन्हें दूसरे सुरक्षा अभियानों में लगाया जा सकता है या नहीं।
नेताओं ने जताई चिंता
सुरक्षा समीक्षा की खबर सामने आने के बाद बस्तर के कुछ नेताओं ने इसे लेकर चिंता जताई है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जी. वेंकट का कहना है कि नेताओं को अभी भी बस्तर के अंदरूनी और दूरस्थ इलाकों में जाना पड़ता है, इसलिए सुरक्षा में कटौती करने से पहले जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए। वहीं पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने सुरक्षा हटाने या कम करने को लेकर चिंता जताते हुए इसे आत्मघाती कदम बताया है।
हालांकि इस पूरे मामले में सरकार का कहना है कि सभी नेताओं की सुरक्षा एक साथ हटाने की बात नहीं है। समीक्षा के बाद व्यक्ति विशेष के खतरे के आधार पर फैसला होगा।







