रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री संचालनालय में सरकारी प्रिंटिंग कार्यों को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय मुद्रण फर्मों ने CM Vishnu Deo Sai को लिखित शिकायत देकर पिछले करीब छह वर्षों में हुए प्रिंटिंग कार्यों, टेंडर प्रक्रिया और कुछ चुनिंदा फर्मों को लगातार काम मिलने की जांच कराने की मांग की है।
मुद्रकों का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में शासकीय मुद्रणालय के जरिए करीब 400 करोड़ रुपये के काम हुए हैं।
शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 2021 में जारी टेंडर के बाद से सीमित संख्या में फर्मों को लगातार काम मिलने पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नई निविदा प्रक्रिया के बजाय पुरानी व्यवस्था को आगे बढ़ाकर करोड़ों रुपये के काम कराए गए। इससे दूसरे स्थानीय मुद्रण कारोबारियों को पर्याप्त मौका नहीं मिला।
स्थानीय मुद्रकों ने शासकीय मुद्रणालय की नई निविदा की पात्रता शर्तों को भी कठोर बताया है। उनका कहना है कि करीब 400 करोड़ रुपये के अनुमानित प्रिंटिंग कार्यों की निविदा में कम से कम 5 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर, वेब ऑफसेट मशीन सहित कई मशीनों की उपलब्धता और करीब 20 हजार वर्गफुट की अधोसंरचना जैसी शर्तें रखी गई हैं।
मुद्रकों का कहना है कि इन शर्तों के कारण छोटे और मध्यम स्थानीय प्रिंटिंग कारोबारियों के लिए टेंडर में शामिल होना मुश्किल हो गया है।
उन्होंने सवाल उठाया है कि जब छत्तीसगढ़ संवाद और छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की निविदाओं में स्थानीय इकाइयों को मौका मिल रहा है, तो शासकीय मुद्रणालय की निविदा में इतनी कड़ी शर्तें क्यों रखी गई हैं।
मुद्रकों ने मांग की है कि निविदा की पात्रता शर्तों को छत्तीसगढ़ संवाद की व्यवस्था के अनुसार सरल और व्यावहारिक बनाया जाए।
पांच फर्मों को लगातार काम मिलने का आरोप
शिकायत में वर्ष 2021 की निविदा का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि इसके बाद करीब पांच चयनित फर्मों के माध्यम से लगातार सरकारी प्रिंटिंग कार्य कराए गए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ मामलों में नई निविदा के बिना या पुरानी निविदा व्यवस्था के आधार पर काम जारी रखा गया। इससे दूसरे कारोबारियों को प्रतिस्पर्धा का अवसर नहीं मिला।
मुद्रण फर्मों ने पिछले पांच वर्षों के एल-1 रेट, कार्यादेश, वास्तविक काम का आवंटन और भुगतान का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि एल-1 फर्म के बजाय किसी दूसरी फर्म को काम दिया गया है, तो इसकी भी जांच होनी चाहिए।
अधिक दरों पर काम देने का मामला
शिकायत में सरकारी प्रिंटिंग कार्यों की दरों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ चयनित फर्मों को ऐसे काम दिए गए, जिनकी दरें छत्तीसगढ़ संवाद और अन्य शासकीय मुद्रण संस्थाओं की तुलना में अधिक थीं।
मुद्रकों का कहना है कि एक जैसे काम के लिए अलग-अलग दरें होने पर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसलिए पिछले वर्षों के कार्यादेश और भुगतान की तुलना कराने की मांग की गई है।
वित्त विभाग के निर्देशों की अनदेखी
मुद्रकों ने 4 मार्च 2025 को वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देश का भी हवाला दिया है। उनके अनुसार, सरकारी विभागों, उपक्रमों, मंडलों और निगमों के मुद्रण, विज्ञापन और प्रचार-प्रसार के काम में एकरूपता और पारदर्शिता के लिए इन्हें छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद शासकीय मुद्रणालय के माध्यम से करोड़ों रुपये के काम कराए जाते रहे।
मुद्रकों का दावा है कि इससे पहले भी सामान्य प्रशासन विभाग और मुख्य सचिव स्तर से 2001, 2018 और 2019 में सरकारी प्रकाशन और प्रचार संबंधी काम छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से कराने के निर्देश जारी किए गए थे। उनका आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ।
छह साल के काम की जांच की मांग
मुद्रण फर्मों ने मुख्यमंत्री से पिछले करीब छह वर्षों के सभी प्रिंटिंग कार्यों की जांच की मांग की है। इसमें टेंडर की शर्तें, फर्मों की पात्रता, एल-1 दर, कार्यादेश, काम का वास्तविक आवंटन, भुगतान और बिना नई निविदा के कराए गए कार्यों की जांच शामिल है।
उन्होंने यह भी मांग की है कि अलग-अलग सरकारी संस्थाओं की प्रिंटिंग दरों की तुलना की जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी या फर्म की मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए।
स्थानीय मुद्रकों का कहना है कि मामला केवल प्रिंटिंग कारोबारियों का नहीं है। यह सरकारी पैसे के इस्तेमाल, पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया और स्थानीय उद्योगों को समान अवसर देने से जुड़ा मामला है।










